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बुधवार, 17 नवंबर 2010

कल्पना

बंद खिड़की का पट खुला
मानो जीवन को मिली नई उडान
क्यूंकि उसका शरीर था निष्क्रिय
उस की कल्पना को मिले नए रंग
अम्बर नीला, बादल सफ़ेद और थे कई रंग
कैसा अम्बर ? कैसे बादल और कैसा इन्द्र धनुष का रंग
सोचता ही रहा , इतने बरसो से लेता हुआ और सक्रिय.

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