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शनिवार, 13 नवंबर 2010

अहसास

जीवन एक नवजीवन का
चक्र है यह अदभुत इश्वेर का
स्रष्टि ने है फिर से दोहराया  इतिहास
बेटी की कोख में पल रही है एक आस
याद आते हैं बो लम्हे जब हुआ था जन्म लाडली का
छोटी सी नाजुक सी गुडिया छाया था  सर्वत्र उल्लास
कब पली, बड़ी और था उस पर यौवन छाया
माँ का आँचल छोड़ कब चल पड़ी वह काया
पिया का अपने पाने को साथ
आज वही नन्ही कलि एक पुष्प बनी
और खुद चल पड़ी मातृत्व के नाजुक पल की ओर
कल जिससे गुजारी थी माँ उसी अहसास की ओर
याद आता है हरपल वो लम्हा जो गुजरा था मैंने
एक हकीकत के साथ .

2 टिप्‍पणियां:

Roshi ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
POOJA... ने कहा…

आज आपके ब्लॉग में पहली बार आना हुआ है...
बहुत सुन्दर रचना...
बहुत अच्छा लगा आपको पढ़कर...