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शुक्रवार, 3 जून 2011

Roshi: बेटियां ही कियूं सहती हैं

Roshi: बेटियां ही कियूं सहती हैं: "बेटियां जब कोख में आती हैं तब भी दुःख देती हैं पैदा जब होती हैं, इस घिनौने संसार में तब भी दुःख देती है बड़ी जब होती हैं शोहदे छेड़ते हैं ..."

7 टिप्‍पणियां:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

हम सबको इस सोच को ख़त्म करना है ...
क्यों सहें बेटियाँ ?
किस माने में कम हैं बेटों से ?

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर विचार .....

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर विचार .....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बेटी -बेटा में फर्क नहीं करना चाहिए ..

Jyoti Mishra ने कहा…

very true.... is very commonplace.
but I thank god for giving me parents who are not partial in a girl or a boy.... but alas many are there who are not fortunate enough :(

BrijmohanShrivastava ने कहा…

वर्तमान समय में एसी मानसिकता बदलना चाहिये

वीना ने कहा…

हमें बेटियों को आगे बढ़ाना चाहिए...और उन्हें आत्म निर्भर बनाना चाहिए....