WATCH

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

दरकते रिश्ते


ये दुनिया के रिश्ते भी  bare    होते हैं अजीब
कभी रुलाते ,कभी हसाते ,होते हैं जो उनके करीब
पर लगता है कुदरत ने कुछ ज्यादा ही गम भर दिए उसके पास
क्यूँ ?आखिर क्यूँ ? जिसको भी चाहा इस कमबख्त दिल ने
पराया फ़ौरन कर दिया उन सभी उसके अपनों ने
आखिर क्यूँ नहीं ?हम समझ पाते दुनिया का फलसफा
यहाँ तो हर वक़्त चलता है जोड़ ,घटाने ,गुना और भाग का चक्कर
जब जैसे चाहा रिस्तो में भी अंक गरित का हिसाब लगाया
दिल ,रिश्ते ,सम्बन्ध सब कुछ तौल लिए तराजू पर
जो संस्कार ,प्यार ,मोहब्बत सिखाये थे माँ ने
उनकी तो अब कोई एहमियत ही न थी अब जिन्दगी में
पर अब यह तो सब पुरानी बेमानी बातें ,अब इनका न कुछ फायदा
पड़ने में ,किताबो में ,फिल्मो में ही रह गया है बस इनका अस्तित्व
मानवीयता तो दरक रही है ,यूँ कहें सिमट गयी है इस युग में

13 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

मानवीयता तो दरक रही है ,यूँ कहें सिमट गयी है इस युग में

आपकी प्रस्तुति मार्मिक और सटीक है.
रिश्तों की पोल खोलती हुई.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,रोशी जी.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रिश्तों को किश्तों में न जिया जाये।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

हाँ मानवीयता तो कहीं खो गयी है..... तभी तो रिश्ते भी रिश्ते न रहे

Sunil Kumar ने कहा…

मानवीयता तो दरक रही है ,यूँ कहें सिमट गयी है इस युग में
अंतिम पंक्तियाँ आज की सच्चाई हैं वैसे पूरी रचना ही दिल में बसी है , बधाई

***Punam*** ने कहा…

"दिल ,रिश्ते ,सम्बन्ध सब कुछ तौल लिए तराजू पर
जो संस्कार ,प्यार ,मोहब्बत सिखाये थे माँ ने
उनकी तो अब कोई एहमियत ही न थी अब जिन्दगी में
पर अब यह तो सब पुरानी बेमानी बातें ,अब इनका न कुछ फायदा"


नए ज़माने में नयी बातें...
सब गिना चुना..एक हाथ दे..एक हाथ ले...!!
या फिर प्यार के नाम पर केवल extract करना इमोशनली....!!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…






आदरणीया रोशी जी
नमस्कार !

ये दुनिया के रिश्ते भी बड़े होते हैं अजीब

कभी रुलाते ,कभी हंसाते ,


बहुत सही कहा आपने…

मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" ने कहा…

insaan insaan ban kar hee nahee rahtaa,
rishte kahaan se nibhaayegaa

achhee rachnaa

Pallavi ने कहा…

sab kuch badal gaya hai na sirf rishte balki bhavnaaye bhi kahte hain parivartan ki prakriti ka niyama hai shaayd yh usi ki den ho ...

Rakesh Kumar ने कहा…

मेरे ब्लॉग पर आप आयीं,बहुत बहुत आभार आपका.बेटी के जन्म दिन पर हार्दिक बधाई
और शुभकामनाएँ.हनुमान जी की कृपा सदा ही
आप पर और आपके समस्त परिवार पर बनी
रहे.

Shah Nawaz ने कहा…

Behtreen bhavo se saji rachna!

दर्शन कौर ने कहा…

क्या बात की हैं प्रवीणजी ने 'रिश्तो को किश्तों में न जिया जाए'-- सही हैं आज रिश्तो का मूल्य ही गिर चूका हैं ..जिसके पास पैसा हैं वहा कई रिश्ते जुठे भी बन जाते हैं और जहा गरीबी हैं वहा अपने भी दूर तक दिखाई नहीं देते ...सार्थक !

Voice of youths ने कहा…

बहुत ही सटीक,मार्मिक और दिल को छू लेने वाली कविता। दरकते रिश्ते पुरे मानवीय समाज के लिए घातक हैं

sushma 'आहुति' ने कहा…

"दरकते रिश्तो की एक अदभुत अभिवयक्ति.....