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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

माँ का आशीर्वाद

कब बच्चे हो जाते हैं बड़े और करने लगते हैं 
फैसले स्वयंपता भी न चलता है रह जाते हैं स्तब्ध हम ..........
कभी उचित कभी अनुचित उठा जाते हैं वो कदमपर हम फोरन भूल जाते हैं 
अपना गमयह ही तो होता है दिल और खून का रिश्ताजो मुआफ कर देता है 
अपने कोख जायों का हर सितममाँ तो माँ होती है औलाद

7 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माँ तो तब भी माँ होती है।

sushma 'आहुति' ने कहा…

माँ तो माँ होती है.....

sangita ने कहा…

रोशी जी, नमस्ते आपका मेरे ब्लॉग पर सदैव स्वागत है | आज जो आपने लिखा है वह सर्वदा सत्य है दरअसल हम हमेशा ही माता-पिता ही रहते हैं और यही हमारी स्तब्धता का कारण होता है |वे भी सीखना चाहतें हैं और इसीलिए गलतियाँ होती हैं उनसे | और हमारी माफ़ी उनका संबल होती है जिसके साथ वे अपना सफ़र निःशंक हो कर तय करते हैं |

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सही कहा आपने ....

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


मां की महिमा अनंत है , अपार है !

सुंदर भावपूर्ण पोस्ट !


बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

somdutt ने कहा…

aap na sahe kaaha ha

somdutt ने कहा…

ma to ma hi hoti ha voo apna bacho ko kabhi dukhi nahi dakh sakti