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मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

मधुमास


शीत ऋतू,शीतल पवन मधुमास में भीगा तन मन
परस्पर उपजा घना विश्वास,तृप्त आत्मा और प्रमुदित हर्षित जीवन
गए थे दोनों हनीमून परविवाह के बाद नवयुगल
पर बदल ही गयी थी काया कुछ ही दिन में पाकर नव स्पंदन
प्यार का रंग भी होता है बड़ा अद्भुत और नवीन
एक दुसरे को स्वसमर्पण ,साथी को आत्मसात करना ही है प्यार
बदल्जता है इसी फलसफे से जीवन का हर रंग और ढंग

5 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

रोशि जी ,.विवाह उपरांत जीवन में एक नया बदलाव आता है,...जो कि न भूलने वाला होता है
बहुत सुंदर पोस्ट्....

मेरे नए पोस्ट की चंद लाइने पेश है..........

नेताओं की पूजा क्यों, क्या ये पूजा लायक है
देश बेच रहे सरे आम, ये ऐसे खल नायक है,
इनके करनी की भरनी, जनता को सहना होगा
इनके खोदे हर गड्ढे को,जनता को भरना होगा,

अगर आपको पसंद आए तो समर्थक बने....
मुझे अपार खुशी होगी........धन्यबाद....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यह मधुरंग चढ़ा रहे।

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत भावमयी...

sangita ने कहा…

अतिसुन्दर ,मेरे ब्लॉग पर स्वागत है

Surinder Singh ने कहा…

Interesting -n- Interactive...