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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

Roshi: भ्रम जाल

Roshi: भ्रम जाल: अवसाद गहन अवसाद में घिर गए थे हम अपनों ने ना दिया होता सहारा तो मर ही गए थे हम अपनों ने ही धकेला था हमें अवसाद की गहरी खाई मेंभ्रम...

2 टिप्‍पणियां:

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत खूबसूरत , बधाई.

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" ने कहा…

bhram dete hein
bhram lete hein
bhram mein jeete hein
bhram se paar nahee paate hein
jo ho nahee saktaa uskee khwaaish mein chale jaate hein