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सोमवार, 23 जुलाई 2012

Roshi: दर्दे- दिल

Roshi: दर्दे- दिल: भीतर का दावानल है ,बांध तोड़ने को व्याकुल पर बाह्य जगत का यह असहज व्योम रोकता है हर पल  क्यूंकि सहेजने में है वो अक्षम उस निर्लज्ज लावे...

3 टिप्‍पणियां:

अर्शिया अली ने कहा…

दिल को छू गये जज्‍बे।

............
International Bloggers Conference!

Devdutta Prasoon ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Devdutta Prasoon ने कहा…

सद्प्रेम,परसेवा में जो दर्दे-दिल मोल लेता है |
उजाले के लिये वह मन के द्वार खोल लेता है ||
उसका दिल एक गहरा समंदर बन जाता है -
खारे जल में भी वह मोटी टटोल लेता है ||