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बुधवार, 15 अगस्त 2012

Roshi: आज़ादी

Roshi: आज़ादी: आज़ादी के इतने बरस गए बीत और हुए क्या हम सच में आज़ाद यह ना सोचा तनिक भी और ना ही हुए हम परेशां  क्यूंकि जन्मते ही हम जकड़े रहे ताउम्र ...

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

शिखा कौशिक ने कहा…

sarthak prastuti .aabhar .WORLD 'S WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

अभी तो असली आजादी है बाकी....अभी तक हमें हमारी सोच ने जकडा है ...

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुंदर। मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।