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गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

Roshi: जख्म माँ के ..

Roshi: जख्म माँ के ..: गहरी निद्रा के आगोश में सोये मासूम नौनिहालों को डांट-डपटकर झटपट माँ ने किया होगा तैयार ,लंच -बॉक्स को वक्त पर खाने की नसीहतें भी दी होंगी...

4 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

मर्मस्पर्शी ...माँ के लिए जिंदगी भर का नासूर ..

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (20-12-2014) को "नये साल में मौसम सूफ़ी गाएगा" (चर्चा-1833)) पर भी होगी।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मन के - मनके ने कहा…

मर्मस्पर्शी

मन के - मनके ने कहा…

मर्मस्पर्शी