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मंगलवार, 14 जुलाई 2015

कच्ची नींव

बरसों की प्यार ,मोहब्बत की ईटों की चुनाई
बड़े फख्र से बनाते रहे मंजिल दर मंजिलें
इतराते रहे जिस मकां की बुनियाद पर जिंदगी भर
वो तो थी खोखली ,दीमक से भरपूर
सब प्यार ,रिश्ते थे खोखले ,बेमानी
सिर्फ मतलब और स्वार्थ पर खड़ी थीं वो मंजिले
गिरना तो था ही उनकी नियति ,
मकां बनाते वक्त ठोस नीव की होती है सख्त जरूरत
हमसे हुई है गलती ,उसका खाम्याजा भुगत रहे है आज तक 

7 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…


कच्ची नींव पर पक्का मकां कभी नहीं बन सकता है
बहुत सुन्दर चिंतनपरक रचना

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16 - 07 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2038 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Asha Saxena ने कहा…

सच में कच्ची नीव पर बना मकान जल्दी ढह जाएगा |

Jitendra tayal ने कहा…

आज का सत्य

Harash Mahajan ने कहा…

सत्य कहा आपने !!

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया ..सत्य

rohitash kumar ने कहा…
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