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शनिवार, 18 जुलाई 2015

हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहानी ,उसका पात्र वो छोटा बालक हामिद ,उसकी बूडी दादी जरूर याद आते हैं जब बच्चों के हाथ में खिलोनें ,,गुब्बारे ,फिरकी आदि देखती हूँ तो हामिद का दादी के लिए ईदगाह से लाया हुआ चिमटा जरूर याद आता आता है ....कितना दर्द था उसमे  ,दादी -पोते के प्यार की अद्भुत रचना लिखी थी बरसों पहले प्रेमचंदजी ने 

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