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शनिवार, 4 जुलाई 2015

Roshi: दिल

Roshi: दिल: दिल जैसी बड़ी अजीब शै है खुदा ने खूब बनाई जिस्म ,रूह सभी पर है इसका बखूबी कब्ज़ा भाई यह खुश तो सभी अंगों पर रहती है बाहर खूब छाई दुखी दिल तो...

3 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kaushik ने कहा…

दिल जैसी बड़ी अजीब शै है

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (06-07-2015) को "दुश्मनी को भूल कर रिश्ते बनाना सीखिए" (चर्चा अंक- 2028) (चर्चा अंक- 2028) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Roshi ने कहा…

dhanyabad shastri ji