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शनिवार, 6 फ़रवरी 2016




तंज़ानिया की  युवती के साथ हुई अमानवीय  घटना  से द्रवित ह्रदय  से निकले उद्गार .......

लड़की तो लड़की ही है
क्या फर्क पड़ता है कि वो तंजानिया की है
या है वो बदनसीब हिन्दुस्तानी,
रगों में तो उसके बह रहा है एक समान लहू
काफिरों कोे देखा सिर्फ उसका जिस्म
और थी काफी उसकीआत्मा लहुलुहान करने के लिए
अस्मत,इज्ज़त से खेलना लड़की की तो जैसे है बाएं हाथ का खेल
काश,एक लम्हे को भी किया होता अपनी बहिन ,बेटी का ख्याल
रुक जाते उन बहशी दरिंदो के हाथ ,ना होता यूं लड़की का चीरहरण
पर यह तो होता ही आया है सतयुग से कलयुग तक
अभी ना जाने कितनी द्रोपदी बची हैं करवाने को वस्त्रहरण

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