सखी जो खुद थी कभी नव परणीता ,आज है दुल्हन लाई
बेटे का सेहरा, नव वधु आगमन वर्षो से थी जो उसने आस संजोई
खुशियाँ भर निज आंचल में ,उमंग है उसके अंग अंग समाई
नव उल्लास है चहुँ ओर, ख़ुशी से वो है न फूली समाई बेटे का सेहरा, नव वधु आगमन वर्षो से थी जो उसने आस संजोई
आ ही गया वो शुभ दिन सखी आज कामना हुई पूरन
जैसा पाया पति संग तुमने लाड -प्यार, इज्जत और सम्मान
देना सर्वदा बेटे- बहू को वैसा ही दुलार और सम्मान
हँसाना -मुस्कराना, रूठना- मानना , चहकना और खिलखिलाना
यही है इस पावन रिश्ते की गहराई, इसको यूँ ही सदैव निभाना
'दूधो नहाओ' पूतो फलो' यह आशीर्वाद है बहुत पुराना
अब तो बस फेसबुक पर मैसेज से है इस जोड़े को समझाना
''शुभ कामनाओ सहित''
देना सर्वदा बेटे- बहू को वैसा ही दुलार और सम्मान
हँसाना -मुस्कराना, रूठना- मानना , चहकना और खिलखिलाना
यही है इस पावन रिश्ते की गहराई, इसको यूँ ही सदैव निभाना
'दूधो नहाओ' पूतो फलो' यह आशीर्वाद है बहुत पुराना
अब तो बस फेसबुक पर मैसेज से है इस जोड़े को समझाना
''शुभ कामनाओ सहित''