उसका मन निर्मल, स्वभाव शांत और
क्यूँ कर ईश्वर ने बनाया उसको ऐसा ?
थी वो कोई ईश्वरी वरदान जो मिली थी उसको वो लली
आत्मा भी थी उसकी शुद्ध, न थी कोई तामसी ब्रती वहां
आज की युग में भी कोई बालक हो सकता है कहाँ ?
न थी उसको कोई जेवर, कपडे और किसी भी उत्पात की चाह
बस सदा जीवन उच्च विचार ही था उसकी राह
कभी भी , कहीं भी , किसी भी चीज को ना थी उसको जरुरत
किया ईश्वर ने बनाया था उसका स्वभाव या उसने खुद बना ली थी फितरत
दूसरो को ही देना, कभी खुद कुछ न लेना ऐसी थी उसकी नियत
कहना आसन लगता है पर निभाना है मुश्किल ऐसा वर्ताब
माँ होकर भी हरदम सोचती कियूं न उसका कभी भी मन न चलता
कितना सयंमित, था उसका मन पर यह कभी भी दूसरे को ना पता चलता ...
रोशी अग्रवाल