गुरुवार, 3 नवंबर 2011

करवा चौथ







आया था करवा चौथ का पावन त्यौहार 
काम बाली-बाई को देख चौक गए थे उसका श्रंगार 
पिछले कई महीनो से मारपीट, चल रही थी उसके पति से लगातार 
चार दिन पहले ही थाना-कचहरी की हुई थी दरकार 
न आने का कारन पूछा तो बोली, जाना था कोतवाली रोज लगातार 
जुल्मी, शराबी को मैंने करवा दिया है बंद अब न आयेगा वो बाहर 
पर उस रोज सब भूल गई उसके जुल्म, सितम और अत्याचार 
पूरा साज श्रृंगार , पीछे तक भरी मांग भरा पूरा था उसका श्रृंगार 
कितना मासूम और कोमल बनाया है विधाता ने नारी का दिल बेचारा 
झट से भूल जाती हैं सभी अत्याचार और पति का हिंसक व्यव्हार 
यही तो है हमारी भारतीय परंपरा, मान्यता और हमारे अदभुत संस्कार... 
                                                               रोशी अग्रवाल 
   

त्योंहरो का मौसम आया

त्योंहरो का मौसम, अदभुत भर देता है रोमांच
घर परिवार, वातावरण-सभी जगह होता है आनन्द ही आनन्द
 गर्मी से जब होती मुक्ति, शरीर, मस्तिस्क सभी होता है प्रफुल्लित 
साफ़ सफाई, साज श्रृंगार , नवीन वस्त्र  सभी करते आनंदित 
शादी, लग्न , उत्सवो की भी लग जाती है जैसे झड़ी  रोज घर बाहर 
सभी कर रहे थे इंतजार इस मौसम और आन्नद का हर बार  
दीपकों की अदभुत छठा, बिजली की लड़ी,पटाखों का शोर 
दिवाली के बाद घर आंगन करता बेटिओं का इंतजार 
जो आती होंगी दूर देश से समेट ह्रदय में भाइयों  का प्यार 
माँ बाप भी तक रहें है द्वार कि कब आएगी लाडली पूरण करने  त्योंहार.... 
                                                        रोशी अग्रवाल 



  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...