गुरुवार, 20 जनवरी 2011

बेटियां

रूई  के फाए सी नरम ,मासूम और कोमल लेती हैं जन्म बेटियां 
पर ईश्वर भी देता  है मजबूत ,बज्र सा दिल उनके अंदर जब जन्मती है बेटियां 
उम्र के साथ साथ मासूमियत ,नरमाहट ,कोमलता और प्यार 
बढ़ती घटती रहती है उम्र के साथ  उनके भीतर ,
दिल बनाया रब ने इतना मजबूत कि सह जाती हैं सभी आघात 
उनको हैं सहने कई प्राकृतिक ,शारीरिक और मानसिक आघात
झेलती आई है वो बचपन से बुढ़ापे तक सिर्फ घर -बाहर, वाद -प्रतिवाद
हम कितना भी आधुनिकता  का दावा कर लें पर झेलती हैं नन्ही कलियाँ 
 सहती आई हैं सदैव बरसों से साल दर साल  यह कोमल मासूम बेटियां..
चाहें सीता हों या द्रौपदी कष्ट झेलें नारियों ने ही 
हुआ है सदैव शोषण प्राचीन काल से ही  इन मासूम बेटियों का ही

                                                      रोशी अग्रवाल 

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