रूई के फाए सी नरम ,मासूम और कोमल लेती हैं जन्म बेटियां
पर ईश्वर भी देता है मजबूत ,बज्र सा दिल उनके अंदर जब जन्मती है बेटियां
उम्र के साथ साथ मासूमियत ,नरमाहट ,कोमलता और प्यार
बढ़ती घटती रहती है उम्र के साथ उनके भीतर ,
दिल बनाया रब ने इतना मजबूत कि सह जाती हैं सभी आघात
उनको हैं सहने कई प्राकृतिक ,शारीरिक और मानसिक आघात
झेलती आई है वो बचपन से बुढ़ापे तक सिर्फ घर -बाहर, वाद -प्रतिवाद
हम कितना भी आधुनिकता का दावा कर लें पर झेलती हैं नन्ही कलियाँ
उम्र के साथ साथ मासूमियत ,नरमाहट ,कोमलता और प्यार
बढ़ती घटती रहती है उम्र के साथ उनके भीतर ,
दिल बनाया रब ने इतना मजबूत कि सह जाती हैं सभी आघात
उनको हैं सहने कई प्राकृतिक ,शारीरिक और मानसिक आघात
झेलती आई है वो बचपन से बुढ़ापे तक सिर्फ घर -बाहर, वाद -प्रतिवाद
हम कितना भी आधुनिकता का दावा कर लें पर झेलती हैं नन्ही कलियाँ