शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010
दोस्ती
सब सुख हर इंसा की किस्मत को नहीं होते नसीब
पर इस परम सुख का हमने आनन्द उठाया है भरपूर और खूब
आज जी हमारा चाहा कि हम इसको बाँटें सबसे और खुश हो जाये खूब
वह सुख जो हमको मिला वो है नायाब दोस्ती का और निभ रहा है बाखूब
हमने तो इस रिश्ते को निभाया दिल से पर दोस्तों ने भी इसको निभाया है खूब
हर सुख दुःख, तकलीफ और दर्द हमसे बांटा और उन्होंने राह दिखाई खूब
हर मुश्किल , कमजोरी , परेशनी पर बढाया हाथ, और साथ निभाया खूब
कई बार दिल था टूटा हमारा , माँ का था जब साथ हमसे छूटा
यही थे फ़रिश्ते जिन्होंने था संभाला हमको और टूटने , कमज़ोर ना होने हमको दिया
हम पूछते है आपसे क्या यह सुख आपको हुआ है नसीब
अगर नहीं तो क्यूँ ना आप भी कोशिश करे बनायें अपना नसीब
नाती आगमन
नव सृजन, नव जीवन , नव आनंद है अपूर्व
कारण है इसके अंतस में समेटे खुश है हम खूब
बालकों का कलरव हैं घर में आँगन खुशियों से पूर्ण
हृदय में है अनेको उमंगें, उत्साह और प्यार सम्पूर्ण
नाती का वो ठुमकना, चलना ,मचलना और इठलाना
कर रहा है वो सबको आनंदित घर -आँगन है गुंजरित.
व्यंजनों की चटपटाहट, बर्तनों की खडखडाहट
रसोई से उडती थी खुशबू और है बच्चो की सुगबुगाहट
मन भरता है कुलाचें अनगिनत और मस्तिस्क है बहुत ही व्यस्त
लगता है जिंदगी यूँ ही चलती रहे, शाश्वत और अनवरत
कारण है इसके अंतस में समेटे खुश है हम खूब
बालकों का कलरव हैं घर में आँगन खुशियों से पूर्ण
हृदय में है अनेको उमंगें, उत्साह और प्यार सम्पूर्ण
नाती का वो ठुमकना, चलना ,मचलना और इठलाना
कर रहा है वो सबको आनंदित घर -आँगन है गुंजरित.
व्यंजनों की चटपटाहट, बर्तनों की खडखडाहट
रसोई से उडती थी खुशबू और है बच्चो की सुगबुगाहट
मन भरता है कुलाचें अनगिनत और मस्तिस्क है बहुत ही व्यस्त
लगता है जिंदगी यूँ ही चलती रहे, शाश्वत और अनवरत
आन्या की पहली होली
फागुन की मस्ती
फागुन की मस्ती है तन मन में है छाई
बगियन में कोयल ,कुंजन में बौर है अलसाईं
नित नवपल्लव संग ,पुष्पों से बगिया है महकाई
प्रकृति ने धरा पर पीत पुष्पों की चादर है फहराई
होली खेलें अदिति संग नीरज देखत माँ है हुलसाई
होली खेलें अदिति संग नीरज देखत माँ है हुलसाई
राघव, अनुभव की मस्ती देख है भावी मुस्काई
होली की बधाई ,बधाई और ढेरों बधाई )--
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