देखी आज एक अर्धविझिप्त माँ
बच्चो को दुलारती- पुचकारती माँ
दिमागी रूप से अविकसित पगली थी वो माँ
ममता, प्यार दुलार में किसी से भी कम ना थी वो
बच्चो की तरफ जैसे ही झपटा एक आवारा कुत्तों का झुंड
चंडी सा रूप धारण किया और भिड गई कुत्तो से वो माँ
हो चाहें स्वस्थ या पगली जैसी भी हो माँ
ईश्वर भर देता है कूट-कूटकर मातृत्व और साहस चाहें जैसी भी हो माँ

