शनिवार, 11 दिसंबर 2010

व्याकुल मन

सुबह  उठकर ना स्नान ना पूजा, ध्यान और ना  व्यायाम
सुबह से मन  है व्याकुल और परेशां
कहाँ गम हो गया दिल और दिमाग  ना थी कोई पेरशानी  ना  था कोई व्यवधान
मन ही था निरंतर  विचलित तीव्र गतिमान
सुबह से कौन था किधर ना ही था ध्यान
शायद यह था मौसम और प्रकृति  का तापमान
किया था जिसने हमको निरंतर परेशान 
घर-भीतर बाहर अन्दर था मन चलायमान
बढती गर्मी उमस वातावारण  का था निरंतर व्यवधान 
निरंतर सूर्यदेव  उगल रहे थे आग और  शोले
ना ही था इसका किसी के भी पास कोई समाधान 
इश्वेर ही अब  दे सकता हैशीतल तापमान 
पशु पक्षी नर नारी सभी व्याकुल हैं  चलायमान
हे प्रभु कर दो दया, भर दो सागर नदी और आसमान
बरसा दो नेह अमृत धरा पर मेघ बरसें घम घमासान .............

जन्म दिन की शुभ कामना

प्रिये पापा,
जन्म दिन मुबारक हो, साकेत के लौह स्तम्भ को
जन्म दिन मुबारक हो मात्र हीन बेटीयों के पिता को ...
जन्म दिन मुबारक को पित्र हीन नातियों के नानू को
जन्म दिन मुबारक हो पित्रहीन बालक के नानूल को
जन्म दिन मुबारक हो सभी बालको के प्रेरणा स्रोत को
जन्म दिन मुबारक,  मुबारक, मुबारक  हो
इश्वेर आपको शतायु करे .................
आपकी बेटी ...................

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