रविवार, 17 फ़रवरी 2019

मासूमों का हत्यारा  

ना आँखों में तनिक अश्रुबिंद ,मस्तिस्क भी हो गया शून्य लांघ गया था वो हैवानियत की सारी सीमाएं 
ना वक़्त लगाया अपनी जान देने में ,ना सोचा तनिक मासूमों की जान लेने में 
सम्वेंदनाएं ,,क्या सब उठा कर रख दी थी ताक पर  उस  हैवान ने?
उफ़ यह आत्मघाती कदम उठाने से पहले कुछ छड़ सोचा होता उसने
बार्डर पर डट कर लोहा लेता दुश्मनों से और ,
 दी होती गर उसने अपनी जान
 तो मिलता शायद उसको देश से शहीद का सम्मान ,अंतिम यात्रा में होता देश वासियों का हुजूम ,पर क्या मिला उसको  जान गंवा कर क्योंकीबना गया वो सबकी नफरत का मजमून 

शुक्रवार, 24 अगस्त 2018





Image result for rakhi pic


राखी का पावन त्यौहार ,लाता है भाई -बहनों के अद्भुत नेह की सौगात
स्नेह्सुत्र को थामे करती है बहना ,ड्योडी पर भाई का इंतजार
भाई भी सूनी हथेली थामे ,मन है उसका भी हुलसता पाने को बहना का प्यार
दोनों का दिल पाखी सम मिलने ,को उड़ -उड़ जा पहुंचे एक दूजे के पास दूरी ने ,मजबूरी ने डालीं है पाँव में बेड़ियाँ ,आज तो हैं ही दोनों उदास
चलेगा जीवन कल अपनी गति से ,कल शायद ना रहेगा इस दुःख का एहसास
यह पर्व है अपने में समेटे ढेरों प्यार के रिश्तों का अतुल्य एहसास

रविवार, 5 अगस्त 2018



भीड़ में थे जब अकेले,तन्हा दोस्तों को साथ अपने खड़ा पाया 
कुछ सुनी उनकी कुछ कहा हमने उनसे 
जिंदगी का भरपूर हमने लुफ्त उठाया 
वो दोस्त ही थें जिनको हरदम साथ खड़े पाया 
वरना रिश्तों की तो ठेरो हर साँस हमने दरकते पाया 

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017


वाघ ,चीता ,सियार सभी हैं जंगली हिंसक प्राणी
बाल्यावस्था से सुनते ,समझते और गुनतेआये हैं सभी
क्या कभी अपने नौनिहाल , प्रियेजन को सौंपा है इन वनचरों के समीप
ना किसी ने बताया ना किसी ने हमको समझाया है कि खतरा है बहुत इनके करीब
बस हमको पता है ,क्या सही है और क्या अनुचित है
हमने यह पाठ अपने बालकों को भी समझाया है
पर्याप्त दूरी ,मेलजोल ,संपर्क सब कुछ अनुचित बताया है
फिर क्योँ ,आखिर क्योँ हम अपने नौनिहालों को जानतेसमझते
सौंप देते है ,आसाराम ,रामरहीम ,जैसे बनेलों के करीब
,आँखे ,आत्मा सबको ताक पर रखकर अपने तथाकथित इश्वर के करीब
कभी ना पलटते ,देखते अपनी उन मासूम कलियों को ,ना जाते उनकी आत्मा के करीब
बताई गर कोई तकलीफ तो फिर फेंक देते वापिस उसी बाड़े में
जनावर का तो धर्म हैः नोचना ,चीरना फाड़ना,जो भी है उसके बाड़े में
गलती तो हम रोज़ करते क्यूंकि पैदा कर देते हैं हर रोज़ एक नया व्याघ
उसकी खुराक ,तृष्णा ,इच्छा ,अपने नौनिहालों को सौंपकर

बुधवार, 20 दिसंबर 2017




जियो अपने लिए ,हंसो अपने लिए


सोचो सिर्फ अपनी ही भूलों के लिए


ख़ुशी महसूस करो अपना आत्मचिंतन कर


अवसाद के चंद लम्हे गुजारो अत्मिश्लेशन कर


जीवन गुजारो निज आत्मा को शुद्ध करके


जैसे घर को बुहारते हो नित्य साफ़ -सफाई करके


जीवनकाल तो इतना सूक्षम है निज मंथन के लिए


बाल्यावस्था से वृधावस्था तक ना किया कुछ स्व विकास के लिए

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017





गिरगिट सरीखे रंग बदलना 
कबूतर मानिद आँख मूँद लेना 
गीध सी तेज नज़र ,बहुत कुछ है सीखना 
जिन्दगी जीना है अगर तो पड़ेगा जरूर सीखना 
लोमड़ी सी मौकापरस्ती ,इन जानवरों से सीखो जीना
देखे हैं हमने ढेरों पारंगत इन विविध कलाओं में
सीको दोस्तों इनसे कुछ बरना मुस्किल हो जायेगा जीना


बलशाली 
कितने चतुर ,और कितने काबिल 
उम्दा वीर और महान बलशाली 
देखे और सुने हैं धराशायी होते हमने 
आँखों से भरभराते साम्राज्य को देहते हमने 
और जब चला ऊपरवाले का रहमोकरम 
चींटी को भी तमाम कायनात सम्हाले देखा हमने

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...