शनिवार, 8 जनवरी 2022

                                                                              माँ
                                                      




कब बच्चे हो जाते है बड़े और करने लगते है फैसले स्वयं 
पता भी ना चलता है रह जाते है स्तब्ध हम 
कभी उचित कभी अनुचित,उठा जाते हैं बो कदम
पर हम फ़ौरन भुला जाते हैं और भूल जाते है अपना गम 
ये ही तो होता है दिल का और खून का रिश्ता 
जो मुआफ कर देता है अपने कोख जायों का हर सितम
माँ तो माँ होती है औलाद दे बेठे चाहे जितने जख्म 
मुहँ से दुआ , दिल से प्यार ही निकलता है उसके हरदम
रिश्तेनाते 


अब मन ना लगता है इस जहाँ में तोड़ दिए सारे रिश्ते नाते 
कांच टूटा आवाज़ हुई बरतन गिरा झनाक हुई 
पर ये कम्वख्त दिल टूटा किसी को खबर ना हुई
पाकर जिनका साथ थे पले बढ़े इस जहाँ में 
तार तार कर दिया रिश्तो का जामा जो पहना था हमने
आत्मा विदीर्ण,शरीर वोझिल और मन है पूरा घायल 
रूह है बेचैन कि क्या हुआ एक पल में हुआ सब खत्म मिनटों में 
सालो में तिनका तिनका जोड़ बुनी थी रिश्तों की चादर 
समय की आंधी आई और उड़ा ले गई चादर कुछ भी
कतरा कतरा बिखर गया और समेट ना पाए हम चाहकर 
क्यों?आखिर क्यों?होता  है यूँ जो कभी ना चाहते हमसब
यही तो भाग्य की विडम्बना कि होनी तो होती है रहकर

कभी कभी 




कभी कभी प्यार के कैसे कैसे अद्भुत रूप देखे 
जीवन में जिनको किया अति प्यार वो ही आज अजनबी सरीखे 
जरुरी नहीं कि मन सदैव ही उसको चाहे और देखे 
रिश्ते ,नाते रोज़ बदलते है दिखाते है अपने रूप अनोखे 
जान से भी ज्यादा प्यारे ,कभी कभी नामाते उनके दिखावे 
प्यार की परिभाषा जिंदगी की स्लेट पर रोज़ ही लिखती नै इबारत 
नए शव्द,नया प्रेम नव पल्लव रिश्ते रोज़ ही है रूप बदलते 
जो मन को भाए,दिल को दे सुकूं वही है अपने सरीखे....
याद आती है वो नन्ही छोटी बिटिया 
बड़ी बड़ी आखों वाली छोटी बिटिया 
कब बड़ी हो गयी थी हमारी बिटिया 
पता ही ना चला हमको यह बिटिया
आज चली बाबुल का घर छोड़ यह बिटिया 
पिया का साथ पाने ,ससुराल हमारी यह बिटिया 
मायके की इज्ज़त और मर्यादा का बिटिया
रखना है तुमको ध्यान सदैव ही बिटिया

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

परिवर्तन


कोई भी परिवर्तन हिला जाता है सम्पूर्ण वजूद

परिवार,समाज ,काया ,जीवन चाहे हो व्यापार में
आसानी से दिल -दिमाग नहीं स्वीकारता किसी भी रूप में
अभ्यस्त हो जाती है ज़िंदगी हमारी पुराने स्वरूप में
अक्सर बदलाव ज़िंदगी में नया रुख अख़्तियार कर लेते हैं
इतिहास साक्षी है परिवर्तन ने मोड़ा है सदेव समाज का रूख
आखिर क्यौ नहीं हम बदलाव को आत्मसात कर पाते काश?
खुद भी मुत्मइन रहते ,दूसरों को भी खुश रख पाते
रोशी --




गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

                                                                     नव- वर्ष




नव- वर्ष की पूर्व संध्या पर सोचा कुछ तो नव संकल्प करें सेहत पर देंगे कुछ खास ध्यान ,और जीवन -शेली को सुनियौजित करें
हँसना -मुसकराना ,दिल से खिलखिलाना और आस -पास के माहौल को सजीव करें
मित्रों के साथ जीवन का शेष वक़्त गुजारेंगे ,कुछ उनकी कुछ अपनी सुनेंगे और -सुनाएँगे
गुस्से को कम करेंगे ,शांति की राह पर चलेंगे ,खुद खुश रहकर दूसरों की मुस्कराहटों का सबब बनेंगे
तन -मन से जो भी हो सकेगा करने की रहेगी कोशिश हमारी ,यौं ही जीने का सफर हम जारी रखेंगे
हमारे कारन दिल ना दुखे अपनों का ,बस यौं ही अपने मुस्तकबिल को मजबूत करेंगे
कुछ नए दोस्तों की गिनती में करेंगे इजाफा ,अपनों के बीच रहकर दुश्मनों से स्वयं दूर रहेंगे
जब साथ हैं रब की मेहर ,सर पर छत ,दो वक़्त की रोटी और तन पर वस्त्र
अपनों का साथ ,बच्चों का प्यार जीने के लिए और क्या चाहिए बताओ सच- सच
रोशी--








रविवार, 26 दिसंबर 2021






नवबर्ष


क्या लिखें ,क्या न लिखें बयां करना है मुश्किल

नवबर्ष में क्या संकल्प लें ,,कुछ नए वायदे खुद से करें
बस यह ही है बहुत जीवन में अब अपने मुश्किल
अब कुछ छोड़ना और नया अपनाना है बहुत मुश्किल
नव -वर्ष पर तो जैसे सैलाब आ जाता है नई कसमों ,वायदों का
हम जैसे हैं वैसे ही रहें ,दिल से ,दिमाग से रोज़ करें खुद को परिष्कृत
निज आत्म -मंथन करें हर घड़ी खुद के हर कृत्य को ,जैसे बुहारते हैं रोज़ घर को
कोशिश हर पल की शायद सुसंस्कृत करे दैनिक आचार -व्यवहार
नित जीवन में सुखद प्रयास करने वालों की होती नहीं है कभी हार
रोशी--

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...