गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

अपनों और गैरो के समीकरण

हमने अपनों कोदिल से चाहा , उन्होंने की हमसे वेबफाई 
गैरो ने दिया साथ हमेशा और पीठ थपथपाई 
अपनों ने सदैव खोंपा खंजर और मै उफ़ भी ना  कर पाई 
गैरों ने लगाया मरहम और साथ ही दवा पिलाई 
अपनों से पेश आए प्यार से और बदले में मिली सिर्फ बुराई  
गैरो ने समझा दर्द हमारा हमेशा और ना  की हमारी रुसबाई  
अपनों ने किया भददा मजाक  और हर बात हंसी में उड़ाई 
गैरो ने हमको सम्हाला  और उनकी गन्दी फितरत बताई 
अपनों ने रुलाया हमेशा और मिलने पर बेरुखी दिखाई 
गैरो ने बढ़ाया  हौसला और पास आ कर हिम्मत बंधाई 
कौन है अपना इस जग में यह मैं  आज तक ना समझ पाई 
अपनों ने कीं सामने मीठी- मीठी बाते गैरों ने कड़वाहट भी समझाई 
अपनों और गैरो के समीकरण में ही रहीं उलझी जिंदगी ना समझ पाई 
चाह कर भी इनके ताने बानो से आज तक न निकल पाई ... 

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस

आज अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है 

समस्त नारी जाति को बेबकूफ़ बनाकर फंसाया जा रहा है 

साल के ३६४ दिन तो हैं उस बेरहम पुरुष के पास 
बस एक दिन नारी जाति के नाम करके उसको फसाया जा रहा है 
कन्या के गर्भ में आते ही उत्पीड़न शुरू हो जाता है  
ज्यादातर का सफ़र तो गर्भ में ही ख़त्म हो जाता है 
बाकी को जन्मते ही होती हैं दुशवारियाँ
खीर मक्खन तो खाए भाई और वो देखती रह जातीं हैं बेचारियाँ 
बचपन गुजार मायके की देहलीज लांघ पहुंचती ससुराल जब नारियां 
माँ से सुना था बचपन से , आई थी मायके में तोहो सिर्फ  मेहमान  
असली घर तो ससुराल है  तुम्हारा जिस घर की होगी तुम शान 
सारा गणित है गड़बड़ाया, नारी को  कौन सा घर है अपना समझ ना आया 
 कहीं ना मिलता सुख उसको पिता और  पति सबकी उससे आशाएं अपार
 99  % महिलाओं की जिंदगी पर भार यही है महिलाओं की ज़िन्दगी का बरसों से सार 
आखिर क्यों  मनाया जाता  है यह महिला दिवस विश्व भर में 
जिस दिन महिलाओं को मिले सम्पूर्ण अधिकार प्यार और मान  सम्मान  घर में
वही उसी दिन होगा असल में महिलाओं का अंतरराष्ट्रीय महिला  दिवस वास्तव में   ... 


गरीबी है सबसे बड़ी बीमारी



कल गई थीं चिकित्सक को दिखाने स्वयं का गला वहां
अचानक एक जर्जर काया वृद्ध सपत्निक आया था वहां 
वृद्ध ने लगभग रोते हुए डॉक्टर से था  फ़रमाया जरा 
कई दिन से डॉक्टर साहब कुछ ना खा पाया हूँ अन्न  जरा, दिल का हाल सुनाया  
वृद्धा भी विलाप कर रही थी और कह रही थी मनुहार 
ठीक से देखो जरा और कर दो उचित उपचार 
तभी हमारा माथा ठनका की है कुछ बड़े खतरे के आसार  
अम्मा कोई अगर है साथ में तो उसको बुलाओ यहाँ पर आज  
वृद्धा बोली  हम ही हैं जो भी हमें बताओ साफ़- साफ़  
माता जी खतरा है बड़ा, कैंसर से है पूरा गला भरा 
ले जाना चाहो तो करो बड़े शहर में जाकर बड़े डॉक्टर से बात 
 वृद्ध और उसकी पत्नी रह गए हक्के- बक्के एक साथ 
सुन वहीँ के वहीँ बैठे रह गए, उठ भी न सके एक साथ  
गले के कैंसर से भी बड़े कैंसर से जूझ रहे थे वे आज  
गरीबी, लाचारी, अकेलापन और भी थीं कई बीमारियाँ उनके साथ 
जो पहले से घेरेऔर जकड़े  थी उनको मजबूरी थी उनके  साथ 
इस कैंसर ने तो उन तकलीफों  में इजाफा  कर दिया हाथो - हाथ   
दिल्ली जाना और इलाज करवाना क्या हो सकेगा संभव उस वृद्ध दम्पति के पास  
शायद अब दिन बचे थे १० - १५ ही जीवन के अब उसके पास 
गरीबी का अभिशाप तो ना जीने देगा ज़िन्दगी के बचे कुछ दिन
लाचारी, बेबसी, गरीबी तो कैंसर से भी बड़ी बीमारी 

शनिवार, 19 मार्च 2011

होली

होली का त्यौहार आ रहा है ,
साथ में रंगों की बौछार ला रहा है
लाल, पीले ,हरे, नीले रंगों का है अदभुत संसार 
हर रंग को  हम देखते और खेलते आये हैं होली पर हर बार 
पर कुछ रंग तो पक्के दिए हैं ईश्वर ने हमको अपार
अदभुत रंगों से की है मानव रचना और बनाया यह संसार 
इन रंगों को पहचानने की शक्ति भी दी है ईश्वर ने विविध प्रकार 
कन्हैया का माखन चोरी,सखियों को छेड़ने पर बदलता रंग 
यशोदा मैया पहचान लेती है अपने लाल का होता फीका रंग 
पति -पत्नी फ़ौरन ही पहचान लेते है अविश्वास से उभरता काला रंग 
चोरी पकड़ने पर चेहरे का रंग बदल हो जाता सफ़ेद  
मतलब निकलने पर इंसा का हर लम्हे बदलता रंग 
यह रंग सब कह देते है और बता देते है इंसा की जात का रंग 
प्यार का रंग तो अदभुत छठा ही बिखेर देता है 
बदल ही देता है सम्पूर्ण व्यक्तित्व और जीवन को बना देता सतरंग 
ईश्वर के रंग में रंगे भक्त की काया का भी होता है अदभुत रंग 
धोखा खाये दिल का रंग हमारी जिन्दगी को करता है बदरंग  
तो यह हैं ईश्वर प्रदत्त भीतर छुपे कुछ अलग-थलग रंग 
होली के रंग तो आते है पल भर के लिए यह तो है  बस एक दस्तूर 
हर पल इनकी होती अलग कहानी और अलग है इनके बहुतेरे  रूप 
पर जैसा भी है यह पर्व है बहुत खूब .. सुन्दर है इसका स्वरुप .                            
                                                            रोशी अग्रवाल 






       
       

मुख्यमंत्री

(हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी के आने के उपलक्ष्य में)
जिले में आज धूम है, शोर है, मुख्यमंत्री के आने का जोर है 
सभी सड़के, मोहल्ले जगमगा रहे और गली गली में शोर है
अफसर और मातहत सबकी थमी है धड़कन 
बहिन जी आये और चली जाएँ यही है मन में अड़चन 
कब ना मालूम दंगा- फसाद हो जाए या हो जाए उत्पात 
पिसती तो जनता ही है पर चाहें जो हो वाद-विवाद 
सारे गावं, अस्पताल, स्कूल इमारते रहीं हैं चमक 
काश ऐसा ही हो हमारे नेता रोज करें दौरा पर यका- यक 
तभी पता चलेगी उनको भ्रष्ट तंत्र की असलियत 
सरकारी दौरों पर तो चमक- दमक, पर फिर छा जाती है  मनहूसियत 
दोनों तरह से पिसी तो जनता और बढ गया एक नया (टैक्स)
जितने ज्यादा सरकारी दौरे , उतनी ज्यादा हमारी बर्बादी 
हमारी अनपढ भोली जनता कभी देखने हैलीकॉप्टर है आती 
कभी वो हीरो कभी हिरोइन के झासे में है फस जाती 
फायदा इसका खूब उठाते हैं हमारे देश के कर्ण धार नेता 
जनता जाए भाड़ में मजा वो खूब उठाते .   







गुरुवार, 3 मार्च 2011

अदिति की कामयाबी पर

प्रिय बिटिया तुमने जो कर दिखाया वो था नामुमकिन
पर हमारे दिए ,गए संस्कार  ,प्यार ,आदर्शों पर 
चलकर कर दिखाया तुमने नामुमकिन भी मुमकिन 
कहना बहुत आसालगता है पैर कर गुजरना है कठिन 
कई बार तुम्हारी भी हिम्मत टूटी ,और मेरी बढ़ी धरकन 
पर मुझको था भरोसा तुम पर ,तुम्हारी क़ाबलियत पर 
की कर जाओगी  सारी मुश्किलें पर और बड़ा दोगी शान 
मुझे तुम पर और तुम्हारी बेटी को होगी तुम पर शान 
वो भी माँ से सीख्गी बचपन से    महनेत और लगन 
हमारे लिए यह खुशयां क्या मायेने रखटी  है तुम्हे नहीं मालूम 
लगा जैसे ढेर सा सुख आ गया पल भर में दामन में 
हमने तो हिम्मत दी पर समंदर में कूदी थी तुम खुद हिम्मत से 
और मिल ही गया तिनके का सहारा , और अब जल्द मिलेगा किनारा 
गर थान लो तो कुछ भी नहीं है नामुमकिन ,यह दिखा दिया तुमने 
जो हमारा सपना था उसकी पा ली है मंजिल तुमने 
इश्वर से है प्रार्थना दे वो तुमको हिम्मत और जज्बा कामयाबी का 
यक़ीनन तुम खुद पर रस्क करोगी ,फक्र करोगी मंजिल पाकर 
यूं तो मेह न त   सभी करते है पर तुमने ससुराल में नवजात बच्ची के साथ  
किया है वो करिश्मा जो   हर   किसी  के न बस की बात 
हमारी हैं दुआएं की इसी तरह करती रहो मंजिलें पार 
ताकि हम बता सकें बच्चों  को कि सीखो अदिति से एक बार                                     


ममता

माँ की ममता भी कितनी होती है बेशकीमती, बेमिसाल 
यह ममता ही हमेशा बनाती है बालक का नसीब और जीवन खुशहाल  
जो बच्चे जन्मते ही खो देते है माँ का आँचल और ममता दुलार  
 बच्चों का जीवन भी रहता है महरूम जो पाते न माँ का प्यार 
सदा कष्ट उठाकर और अपना सब कुछ भुलाकर माँ रहती हरदम औलाद के करीब 
माँ का जीवन तो जैसे हर पल बस रहता अपने नौनिहाल के करीब  
अपनी ख़ुशियां , गम ,शौक ,अरमान सारी दुनिया घूम ली इर्द गिर्द बालक के 
सोच ना पाती  माँ  कुछ भी अपने बारे में जब होती है आसपास अपने बालक के 
बालक हँसे ,माँ मुस्कराए ,बालक उदास माँ घबराये यही है सिलसिला बरसों  से 
जब भी हो लाल उसका कामयाब ,माँ अपने भाग्य पर  इतराए ख़ुशी से  
ऐसी होती है माँ की ममता ,जिसको देवता भी ना  जान पाए    

                                                              रोशी अग्रवाल  

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...