मंगलवार, 22 नवंबर 2022

 वक़्त और हालात के मुताबिक खुद को ढालना उचित है

हवा के विपरीत जो भी चला है ,उसने सदेव नुकसान उठाया है
सागर में भी नौका का रुख नाविक हवा के अनुकूल ही खेता है
यह ही नियम जीवन में लागू सदियों से सदेव होता आया है
वेद,पुराण ,इतिहास सब बताते हैं कि यही नियम इस्तेमाल होता आया है
परस्पर संधि प्रस्ताव ,आत्मसमर्पण इसी नियम के पर्याय रहें हैं
शायद कामयाबी उनको ही मिली बाकी तो नेस्ताबूत होते आये हैं
--रोशी
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शनिवार, 19 नवंबर 2022

 यह क्या किया श्रधा ,प्यार कैसा था तुमने किया किया?

प्यार करना गुनाह तो ना था ,पर खुद का अंत कितना भयानक किया ?
माता -पिता को अपनी बालिग उम्र बता कर था तुमने चुप कर दिया
उनकी ममता ,सलाह सब को अनदेखा तुमने उस पापी के लिए था किया
कितनी पीड़ा मां ने उठाई ,अपने प्राणों का भी उसने था अंत किया
पिता ने भी कितना तिरस्कार ,तकलीफ उठाई तुम्हारे यू गायब होने के बाद
जन्मदाता की ममता पलों में झटक दी अंदेशा ना हुआ खतरे का उस बहशी के साथ
काश ,प्रेमी की थोड़ी सी जानकारी हासिल की होती तुमने उससे ,मोहब्बत के बाद
इतना वीभत्स अंत शायद ना होता गर सुन ली होती तुमनेअपने जन्मदाता की बात
आफताब का गुनाह शायद सामने ना आता गर पिता ने ना छानबीन की होती
तुमने उनको ठुकरा दिया था भले ही पर उनको अपनी बिटिया ना कभी भूली थी
--रोशी

बुधवार, 16 नवंबर 2022

 यह दुनिया भी अजीब शै है दोस्तों

बड़ी जल्दी आपको भूल जाती है या ,भुला देती है
गर इसकी रफ़्तार से ना चलो ,आपको गुमा देती है
सच बोलो गुस्सा करती है, ना बोलो तो मगरूर बताती है
ज्यादा मेल -मिलाप करो तो घर से फारिग बताती है
संकोची प्रवृति रखो तो घमंडी का तमगा पहना देती है
जिनका भला सोचो तो बेबकूफ हमको वही जनता बनाती है
गैरों का सोचा बहुत दोस्तों पर दिल ने अब ह़ार मान ली है
ठीक है इस ऊम्र तक आते- आते अब दुनिया पहचान ली है
--रोशी
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मंगलवार, 15 नवंबर 2022

 शरद ऋतू है आई ,वातावरण में है शीतल वयार छाई

तन को दे ठंडक का एहसास ,मन भीतर नव उजास छाई
शादी ,व्याह ,,दावतों के दौर भी दे रहे अनुकूल मौसम का संकेत
बेहतरीन मौसम का लुफ्त उठा रहें हैं सब ,तगड़ी है इसकी गिरफ्त
सुस्वाद व्यंजनों का स्वाद तो आता ही इस मौसम में ,होता सब हज़म
सिल्क की चमक मखमली एहसास तो महसूस करते सिर्फ शरद ऋतू में
पश्मीना,जामावार का सुखद एहसास तो करते हैं हम सब शीतकाल में
गज़क ,रेवड़ी भी आती हैं परदे से बाहर सिर्फ थोड़े वक़्त के लिए इस मौसम में
आइसक्रीम जो राज करती है दिलों पर उसको भी जाना होता है अज्ञातवास में
इस सर्वसुख के साथ एक मार्मिक तस्वीर भी है इस अद्भुत मौसम की
बेघर ,गरीब के लिए बहुत दर्दनाक रातें होती हैं इस मौसम की
बहुत भयानक पक्ष ,दर्दनाक पहलु है इस खुशगवार मौसम की
यह तो होता हमारा नसीब किसको है क्या मिलता?
--रोशी

सोमवार, 14 नवंबर 2022

 हिंदुस्तान के सभी नौनिहालों ,बच्चों को बाल दिवस की शुभकामनाएं

आइये शपथ ले की हम उन से उनका बचपन ना छीने उनको भरपूर जीने दें
भ्रूण हत्या ना कर बेटियों को जन्मने दें ,बेटों को बेहतर संस्कार दें
स्कूल की हैसियत नहीं तो कम से कम मानवता का पाठ खुद से दें
चोरी ,झूठ , हत्या जैसे व्यसनों से दूर रखें ,माँ -बहनों की इज्ज़त का गुर दें
अपनी इच्छाएं ,अपने सपने बच्चों पर ना लादें,उनको उड़ने के लिए पंख दें
बुजुर्गों की इज्ज़त ,परिवार का साथ जरूरी ना बताया उनको तो नस्लें होंगी बर्बाद
सीखेंगे जो बचपन में तो चलेगा जीवन भर बच्चों के साथ ,हम रहेंगे सदेव आबाद
यह भविष्य हैं इनको सुरक्षित रखना है इनको जरूरी गर दुनिया पर करना है राज़
परचम लहराएगा दुनिया में हमारा ऋषि सुनक ने कर डाली है इसकी शुरुआत .....
--रोशी
May be a cartoon of child and text that says 'Happy Children's'
Vinita Agarwal
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रविवार, 13 नवंबर 2022

 जीवन में खुश रहने का है मूल- मन्त्र बहुत ही छोटा तजुर्बे से

अपने गम ,तकलीफों को समझो सदेव कमतर जहाँ भर से

खुशियों को महसूस करो गैरों से सौ गुना ज्यादा दिल से
दुःख कभी ना कष्ट देगा तुमको,सुख हमेशा बरकत का एहसास दिलाएगा
जब रहेगा दिल –दिमाग खुश तो घर –परिवार हंसेगा-खिलखिलायेगा
जीने के नज़रिए को है बस बदलने की जरूरत ,यह कोई और ना बताएगा
सोच अपनी खुद बदलने की है जरूरत ,जीवन खुशहाल हो जायेगा
दूसरों के घरों में नहीं अपने घर का आइना देखो ,सब खुद पता चल जायेगा
अपनी ख़ुशी से कम दूसरों के घर झाँकने में निकल दी फ़क़त जिन्दगी
अब जितनी बची सुधार लो दूजा और मौका फिर ना मिल पायेगा
....रोशी
May be an image of text
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मंगलवार, 8 नवंबर 2022

 ऊम्र बिता दी तजुर्बे हासिल करते -करते

हर गुजरता दिन दे जाता है नयी सीख जाते -जाते
इतने संकरे मोड़ों से गुजरी है जिन्दगी अब तक
बहुत कुछ हासिल कर लिया इस ऊम्र तक आते -आते
होती डगर सबकी टेड़ी ही होती है ,आसां नहीं यह सफ़र जिन्दगी का
किताबें तो सिर्फ पढना हैं सिखाती ,हर दिन देता तजुर्बा जीने का
शतरंज की बिसात की मानिद है जिन्दगी,शह-मात का खेल है हर रोज़
तरक्की ,यश -अपयश जन्मते ही विधना लिख देती साथ हमारे
बस कितने इम्तेहान होंगे जिन्दगी भर ये ही ना होता हाथ हमारे
--रोशी

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...