बुधवार, 3 मई 2023

 भारतीय गृहणी की रोज़ नींद खुलती है सुबह दरवाज़े की या बाई की घंटी से

तत्काल उड़ जाती है नींद सपनों से बाहर आकर वो रसोई में ही रूकती है
ख्वाब उड़ जाते हैं भाप की तरह चाय का पतीला,और गैस के पास नींद खुलती है
गैस का लाईटर पति का टिफिन अधखुली आँखों से ही भारतीय नारी दूंढ लेती है
कुकर की तेज सीटी दिमाग की सभी नसों को तत्काल मिनटों में खोल देती है
बच्चों की पसंद, पति ,परिवार के वास्ते स्वादिष्ट रसोई मिनटों में सोच लेती है
आने वाले अतिथि के स्वागत का सारा मेनू होता है उसके बाएं हाथ का खेल
सीमित बजट में सबको खुश रखना जानती है गृहणी अहम् होता परिवार में रोल
परिवार का पंचिंग बैग होती है फिर भी मुस्कराहट से अपना किरदार निभाती है
रोबोट से तेज करती काम,मशीन ना कोई उसकी बराबरी कर सकती है
रोशी

सोमवार, 1 मई 2023

 बेमौसमी बरसात ने हैं धो दिए सारे गरीब किसान के सपने

गेंहू जो पड़ा था अधकटा खेतों में ,बारिश ने ख़त्म कर दिए मिनटों में
अधपके खरबूजे,तरबूज सड गए,सब्जी ,फल सब बर्बाद हो गई पानी में
जिस फसल को देख जीता है हमारा किसान बर्बाद हो गया इस पानी में
पल भर में सारे ख्वाब ,मनसूबे बेटी का व्याह ,घर ,परिवार सब बह गया पानी में
बेहद मुश्किल हालात ,तनाव में जीता है,अन्नदाता ना जाने कब बरस जाए पानी
मेघ ना बरसे तो मुश्किल में है जीता किसान ,रोता है जब ज्यादा बरसता है पानी
पूरे बरस का हिसाब किसान का टिका होता फसल पर ,जो बहा ले गया पानी
सोच ना सके कोई की कितना निभाता अहम् रोल किसान की जिन्दगी में है पानी
रोशी
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रविवार, 30 अप्रैल 2023

 द्रोपदी का संताप,पीड़ा ,क्या वास्तव में महसूस भी कोई कर पाया

पिता ने निज स्वार्थ की खातिर अग्नि, यज्ञे द्वारा था उसको पाया
प्रियतम का स्वप्न जो था वर्षों से संजोया द्रोपदी ने आज निज समक्ष पाया
पांच पांडवों में बाँट दिया सास ने तत्काल शायद समझकर उसको निर्जीव काया
नव वधु के जखमों का हिसाब और ,दिल की किरचों को समेटना है नामुमकिन
शब्दों में समेटना है असंभव ,उसकी दर्दनाक पीड़ा बया करना है नामुमकिन
कर्ण भी है हमारे इतिहास का बेहतरीन योधा जो सुलगता रहा गहन पीड़ा से सदेव
सगी मां के समक्ष हुआ था उत्पीडन अवेध संतान का था उसने तमगा पाया सदेव
मर्मान्तक ताने ,उपहास थे जीवन भर झेले ,भाइयों से सिर्फ उपेक्षा को पाया सदेव
ममता तो ना दी मां ने पर सगे बेटे के जीवन दान को किया उसका उपयोग
समाज से बहिष्कृत, योधा पग पग हुआ सदेव जख्मी ,बयाँ न कर सका इतिहास
रोशी

सोमवार, 17 अप्रैल 2023

 द्रोपदी ने गर ना दी होती उलहाना दुर्योधन को तो ना होती महाभारत की घटना

तुलसीदास को गर ना डी होती पत्नी ने उलहाना तो महाकाव्य की ना होती रचना
सीता ने ना लांघी होती लक्ष्मणरेखा ना भस्म होती रावण की स्वर्ण लंका की शान
शिशुपाल ने ना लांघी होती मर्यादा तो यूं अपने भाई के हाथों ना गंवाई होती जान
एक्लव्य की ना होती गुरु से भर्त्सना तो पिछड़ जाता वो लगाने में अचूक निशाना
गर भरे ना होते कैकई के कान ,उलट गया होता रामचरित मानस का सम्पूर्ण ज्ञान
कंस ने गर खाया होता रहम बहन पर तो ना जाती सगे भांजे से उसकी जान
कितने भी कर ले कोई लाख जतन, पर होनी होती है बहुत बड़ी और बलवान
रोशी
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रविवार, 16 अप्रैल 2023

 भरी दुपहरी तपती धूप में बिन पानी रह कर देखो हर बूँद की कीमत जान जाओगे

कभी राशन या बस की लाइन में दोपहर गुजारो हाथ के पंखे की जान जाओगे
अंतड़ियाँ भूख से कुलबुला रही हों तो अन्न केहर दाने की कीमत जान जाओगे
सर पर जब नहीं हो छत्त तो छप्पर की कीमत भी तत्काल जान जाओगे
जब ना हो सर पर मां -बाप का साया तब उनकी अहमियत सही से आंक पाओगे
जेब में जब नहीं हो फूटी कौड़ी तो एक एक टके की कीमत जान जाओगे
मिलकर किसी असाध्य मरीज़ से अच्छे स्वास्थ्य की एहमियत जान जाओगे
शीत लहर में तन पर ना कपडा तो दो गज चीर की कीमत तत्काल जान जाओगे
मिलीं जब सारे जहाँ की खुशियाँ आसानी से रब का शुक्रिया ना अदा कर पाओगे
रोशी

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

 सपने देखना मत छोड़ो ,कुदरत से बमुश्किल मौका मिलता है

किस्मत वाले होते हैं वो जिनके सपनों को खुला आसमां मिलता है
पंख सिर्फ वो ही है पाते जो बुलंद इरादे,जज्बों को जिन्दा हैं रख पाते
समंदर लांघने की हिम्मत है जो रखता ,ईश्वर भी उसके इरादे ना डिगा सकता
कड़ी मेहनत ,पूर्ण लगन जब हो दिल में ,वक़्त भी शायद उसकी परीक्षा है लेता
गर ठान लिया मन में तो चीर सकता है पर्वत का सीना भी हर इंसान
सिर्फ हवाई घोड़े कल्पना में दौड़ाकर कामयाब ना हुआ कोई इंसान
ऋषि ,मुनि ,वीर योधा सिर्फ वो ही दर्ज करा सके इतिहास में अपना नाम
जीवन जिन्होंने अपना समर्पित कर दिया था अपने निज कर्मों के नाम
रोशी
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 वो थी अल्हड मासूम ,आँखों में उसने अपनी ढेरों सपने सजाए

आम सी लड़की की माफिक उसकीथी कुछ ख्वाहिशें वो दिल में थी सजाए
राजकुमार सफ़ेद घोड़े पे सवार उसको डोली में साथ ले जाएगा
उसकी हसीन दुनिया होगी ,खुशियों के सिवा गम तो पास फटक ना पायेगा
इस निष्ठुर ,पापी समाज ने गुपचुप उसके सपनों पर था आघात किया
असाध्य रोगी से था गुपचुप उसका विवाह कराया,जिन्दगी पर बज्रपात किया
दुखों का पहाड़ था टूटा उस बच्ची पर, कुछ ही माह में उसको विधवा बनाया
जानकर उसकी व्यथा ,एक फरिश्ता उसकी बदनसीब जिन्दगी में था आया
थामा उसका हाथ जिन्दगी को उसने अपनी मोहब्बत से रंगीन बनाया
बुराई पर हुई अच्छाई की जीत ,ऐसे फरिश्तों ने इस दुनिया को है हसीन बनाया
रोशी

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...