मंगलवार, 25 जुलाई 2023

 

लरजते,बरसते मेघ बरसा रहे यदा कदा शीतल फुहार
तन -मन का मिटे ताप ,प्रकृति ने ओडी हरितमा की चादर
कोयल की कूक ,पपीहे का गान, गूँज उठे सभी खेत खलिहान
तृप्त धरा हुई परिपोषित ,झूम उठे सम्पूर्ण खेतों के धान
मौसम ने बदला माहौल नाच उठे मयूर वन -उपवन में
फिजां में गूँज उठे गीत सावन के ,ढोलक की थाप गूंजे घर आँगन में
घूमर ,नृत्यों से सज गयीं महफिलें ,लहंगा चुनरी छायी सब अंगनो में
सजनी खडी ड्योडी पर राह तके प्रियतम की ,आया मस्त सावन सजीला
क्यूँ गए पिया परदेस सावन में ,वयां न कर सके अलबेली सखियों संग अपनी पीड़ा
--रोशी
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मंगलवार, 18 जुलाई 2023

 दरत का कहर विभिन्न रूपों में दिखता है रोष

कहीं है भीषंड गर्मी ,कंही है जबरदस्त बाड़ का प्रकोप
जान -माल को रौंदती जल की प्रचंड धारा तहस -नहस करती धरा को
खेत -खलिहान हुए सराबोर जल से ,सर्वत्र जल प्रपात लील गया धरती को
बेघर हुए नर -नारी ,मवेशी बहे, डूब गया छप्पर बचा ना कुछ खाने को
प्राकृतिक आपदा हिला देती जड़ें समाज के निम्न स्तर के प्राणी की
बर्बाद होता समूल वही फर्क ना पड़ता और किसी व्यक्ति को
सूखा ,बाड़ ,भूकंप सरीखी आपदाएं कर देती नष्ट सिर्फ निर्धन को
'कोड़ में खाज' कहावत को शायद वो लिखवा कर लाया जीवन भर को
--रोशी
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शनिवार, 15 जुलाई 2023

 कभी सोचा यह बरसते मेघ हमसे बहुत कुछ कहते हैं

जब बरसते हैं ,लरजते हैं सब कुछ दिल का कह जाते हैं
जब मेघ प्यार दिखाते हैं आसमां से बड़ी अदा से बरसते हैं
प्यार मोहब्बत दर्शाते हैं ,बिखराते हैं खुद से बरस -बरस कर
रोद्र रूप भी खुलेआम दिखाते हैं ,अपनी पीड़ा शायद बयां कर
तूफां भी लाते हैं अन्दर दबे हुए दर्द शायद सब एक साथ निकालकर
सुनामी भी शायद तकलीफों ,पीडाओं को व्यक्त करने का ही तरीका है
कभी महसूस कर के देखो शायद सब समझ आने लगेगा सच यही है
तेज हवायें भी बखूबी दोस्ती निभाती हैं मेघों के साथ ,पवन,मेघ का रिश्ता है पुराना
जब एक पीड़ा में होता है , दूजा साथ निभाता है ,परस्पर साथ निभाकर अपना
--रोशी
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गुरुवार, 13 जुलाई 2023

 सावन की रिमझिम फुहारें ,ताप से झुलसे मन को दे जाती चैन

हरितमा से पूर्ण प्रकृति की हरी चादर आँखों को देती शीतलताऔर सुकून
पपीहे की पुकार ,बूंदों की फुहार भिगो देती है अंतर्मन भीतर तक
माटी की सौंधी खुशबू बिखर जाती है भरपूर फिजां में दूर -दूर तक
झूले पर बेटियां ,लहराती चुनरियाँ ,खनकती चूड़ियाँ उकेर रही दृश्य बेहतरीन
सावन के गीत,ढोलक की थाप बिखेर रहे अद्भुत स्वर,बना रहे माहौल रंगीन
लहरिया ,बंधेज तो छा ही जाता है सर्वत्र ,चुनरी ,साड़ी ,लहंगा दिखता हर ओर
हरे वस्त्रों की जैसे आ जाती बाड़ , हरितमा छा जाती बहुतायत में चहुँ ओर
कवियों ने विविध भांति बखाना है इस मास को अनेकों प्रकार अपनी कविताओं में
थाह ना कोई पा सका है सावन की मस्ती ,सुकून ,आनंद की अपने अपने जीवन में
गर्म तवे पर ज्यों जल की बूँद छड मात्र दे जाती शीतलता का एहसास तप्त तवे को
सावन की फुहारें भिगो जाती तप्त ह्रदय को तवे सरीखा ,मिल जाती ठंडक तन को
--रोशी

मंगलवार, 13 जून 2023

 चाहे बिच्छु हो या हो सर्प ,फितरत होती एक समान

पाया है कुदरतन जो जन्मजात ,है न कोई उसमें भरम
कोई ना छोड़ते मौका जहर उगलने का मौका जब भी मिलता
ज्यूँ साधू देता प्रवचन सदेव चाहे कितनी विषम परिस्थिति में उलझता
प्रेम का पाठ पडाना ही होता है उसका जन्मजात स्वभाव सदेव
बदले कभी फितरत दोनों की अमृत हो या जहर उगलने की
रखना याद हमेशा मरते दम तक भी लेश मात्र छोड़ ना सके आदतें खुद की
-रोशी
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सोमवार, 12 जून 2023

 घर सूना ,आँगन सूना ,और सारा चौबारा

बच्चों की चुलबुलाहट से है सूना घर सारा
धमा -चौकड़ी ,भागदौड़ से रहता घर गुलजार
कभी लड़ाई ,कभी ठहाके रौनक बढ़ाते घर की हर बार
बेटियां आती कुछ पल गुजारने मायके छुट्टियों में हर बार
याद आती उनको भी अपनी गृहस्थी बस कुछ दिन यूं ही गुजार
नानियाँ चाहती है सदेव की बच्चे सकुशल लौटें वापिस अपने घर बार
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  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...