गुरुवार, 3 मार्च 2011

ममता

माँ की ममता भी कितनी होती है बेशकीमती, बेमिसाल 
यह ममता ही हमेशा बनाती है बालक का नसीब और जीवन खुशहाल  
जो बच्चे जन्मते ही खो देते है माँ का आँचल और ममता दुलार  
 बच्चों का जीवन भी रहता है महरूम जो पाते न माँ का प्यार 
सदा कष्ट उठाकर और अपना सब कुछ भुलाकर माँ रहती हरदम औलाद के करीब 
माँ का जीवन तो जैसे हर पल बस रहता अपने नौनिहाल के करीब  
अपनी ख़ुशियां , गम ,शौक ,अरमान सारी दुनिया घूम ली इर्द गिर्द बालक के 
सोच ना पाती  माँ  कुछ भी अपने बारे में जब होती है आसपास अपने बालक के 
बालक हँसे ,माँ मुस्कराए ,बालक उदास माँ घबराये यही है सिलसिला बरसों  से 
जब भी हो लाल उसका कामयाब ,माँ अपने भाग्य पर  इतराए ख़ुशी से  
ऐसी होती है माँ की ममता ,जिसको देवता भी ना  जान पाए    

                                                              रोशी अग्रवाल  

6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माँ की ममता जैसा पवित्र कुछ भी नहीं है।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

बेनामी ने कहा…

...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

Nirantar ने कहा…

377—47-03-11
माँ की ममता की,कोई समता नहीं होती ..............

माँ की ममता की
कोई समता नहीं होती
उसकी कोई कीमत
नहीं होती
उस से ज्यादा प्यार की
अनुभूती नहीं होती
जिसने पायी उस से
अच्छी किस्मत नहीं होती
निरंतर मिले
हर किसी की किस्मत
ऐसी नहीं होती
जिसने इज्ज़त नहीं करी
उस से ज्यादा बुद्धी
किसी की भ्रष्ट नहीं
होती

07—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
www.nirantarajmer.com

Anupama Tripathi ने कहा…

ऐसी होती है माँ की ममता ,जिसको देवता भी ना जान पाए

यकीनन -ऐसी ही होती है माँ की ममता -
बहुत सुंदर रचना -
बधाई.

Anupama Tripathi ने कहा…

यकीनन -ऐसी ही होती है माँ की ममता -
बहुत सुंदर रचना -
बधाई.

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