क्या सुना है कभी ,माँ ने किसी पागल को जना है ?
माँ की कोख से सदेव एक तंदरुस्त बालक ही जन्मा है
समाज के तरकश और तानों से ही शायद वो पागल हुआ है
बेहिसाब धोखों के खंजरों ने उसका दिल दिमाग बिदीर्ण किया है
कमतरी का एहसास दिला कर उसका हौसला ,रुतबा समेट दिया है
जब -जब कोशिश की अपने पाँव पर खड़े होने की ,नीचे से जमीन को समेटा है
हर लम्हा बस उसकी कमज़ोरियों का उसको बदस्तूर एहसास करवाया है
ईश्वर ने स्वस्थ -तंदरुस्त भेजा था धरती पर ,समाज ने उसको पागल बनाया है
--रोशी
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