शुक्रवार, 14 अप्रैल 2023

 जिन्दगी के कुछ हिस्से उलझनों और तकलीफों से जूझते निकल गए

कब जिन्दगी के उम्र के इस पड़ाव पर आ खड़े हुए पता नहीं चला
अपने शौक ,पसंदगी तो समेट दिए बक्से में दुनियादारी में ही उलझ कर रह गए
यह कहानी है हर घर की हर मोहतरिमा खुद ही यह कहानी बयां करती है
कुछ अपना ख्वाब पूरा कर पाती है कुछ के सपने रह जाते हैं अधूरे
ऊँचा मुकाम ,ओहदा हर किसी की किस्मत में वाकई लिखा नहीं होता
कुछ तो ता -उम्र अपने सपनों को जामा पहनाने में ही गुजार देतीं हैं
घर की चाहरदीवारी के भीतर ही गुजर जाती हैं यूं तो सारी जिन्दगी
परवाज़ तो किस्मत वालों को ही नसीब होते हैं ,पूरी जिन्दगी
कट जाती है एड़ियाँ रगड़ते -रगड़ते वर्ना यह बेआवाज़ सारी जिन्दगी
सुकून ,ख़ुशी खुद ही दूंढ लो इस जिन्दगी में वर्ना यह होती है बड़ी बेरहम जिन्दगी
रोशी
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 यह औरतें जो हैं वे बहुत कुछ जानती हैं

बचपन से माँ का चेहरा पड़ना जानती हैं
भाइयों को क्या चाहिए सब अच्छे से जानती हैं
बाबूजी आज क्यूँ खफा हैं भली भांति पहचानती है
घर में बचत का हुनर मां से खुद ही जान जाती हैं
बची रोटी को नमक के साथ निगलना जानती हैं
फटी फ्रॉक को सिलकर महीनो पहनना बाखूबी जानती हैं
अपने खचों में कटौती करना खूब जानती हैं
कम पैसों में पूरा महीना राशन खींचना जानती हैं
तार -तार हो चुकी साड़ी में इज्ज़त बचाने का हुनर खूब जानती हैं
घर की देहरी तक घर की बातें समेटना कुदरतन जानती हैं
मायके और ससुराल की सीमायें कितनी हैं यह जानती हैं
रिश्तों में तुरपाई करना भी बाखूबी जानती हैं
बिन रुके ,बिन थके गृहस्थी की गाड़ी को दौड़ना जानती हैं
एक वक़्त पर ढेरों किरदार निभाना वो सब जानती हैं
छा जाता है चहुँ और गहन अंधकार तो उम्मीद का दिया जलाना वो जानती हैं
इज्ज़त,प्रेम से रखो उसको सम्हालकर बरना चंडी का रूप रखना भी वो जानती हैं
रोशी

 सौ फीसदी सही होते हुए भी अक्सर चुप्पी लगानी पड़ जाती है

बेबजह हंसी का नकली मुखौटा चेहरे पर चड़ाना पड़ जाता है
कभी हालात ,कभी रिश्ते ,कभी अपने संस्कारों का मोल चुकाना पड़ता है
जुबां मानो चिपक जाती है तालू से ,शब्दों को भीतर ही भींचना पड़ जाता है
भीतर होता है विचारों का तूफां,जिसको यूं ही दिल के भीतर दबाना पड़ता है
लफ्ज़ होते हैं बैचैन बाहर आने को उनको बमुश्किल समझाना पड़ता है
रिश्तों की तुरपाई के लिए है बहुत जरूरी, जुबान को भी सुई से सीना पड़ता है
रोशी
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मंगलवार, 4 अप्रैल 2023

 मध्यवर्गीय आम इंसान की जिन्दगी बचपन से बुढ़ापे तक बस सपनों में गुजरती है

सुनहरे ख्वाब बस जीवन की रेलमपेल में ही सिमट कर जिन्दगी खिसकती जाती है
हर रात नया ख्वाब संजोना ,उसको सिरे चडाना करने की जी तोड़ कोशिश ताउम्र जारी रहती है
मकान ,दुकान ,शादी ,बीमारी इनसे ही जूझते उसका शुरू होता दिन ,कब रात गुजर जाती है
उच्च बर्ग से मुकाबला ,पग -पग पर जिल्लत शायद इनके अपने नसीब में लिखी होती हैं
खुद को हर कदम पर कमतर समझना शायद इनकी यह कुदरतन मजबूरी होती है
दुनिया के ताने ,उलाहने सब कुछ इनकी ही झोली में हैं आते रोज़ इनसे दो चार होते हैं
घर ,बेटी की इज्ज़त बचाने में इनको जरा सी शांति मयस्सर नहीं होती बस जिन्दगी की गाड़ी दौड़ी चली जाती है
इस जहाँ के एशो आराम ,तमाम सुकून शायद कुदरत ने नवाजे हैं कुछ खास आवाम के वास्ते
दुनिया भर की मशक्कत्तों से जूझते -जूझते वक़्त से पहले ही बुढा देती है जिन्दगी
आम आदमी की हसरतें
रोशी
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शुक्रवार, 31 मार्च 2023

 वो थी अल्हड मासूम ,आँखों में उसने अपनी ढेरों सपने सजाए

आम सी लड़की की माफिक उसकीथी कुछ ख्वाहिशें वो दिल में थी सजाए
राजकुमार सफ़ेद घोड़े पे सवार उसको डोली में साथ ले जाएगा
उसकी हसीन दुनिया होगी ,खुशियों के सिवा गम तो पास फटक ना पायेगा
इस निष्ठुर ,पापी समाज ने गुपचुप उसके सपनों पर था आघात किया
असाध्य रोगी से था गुपचुप उसका विवाह कराया,जिन्दगी पर बज्रपात किया
दुखों का पहाड़ था टूटा उस बच्ची पर, कुछ ही माह में उसको विधवा बनाया
जानकर उसकी व्यथा ,एक फरिश्ता उसकी बदनसीब जिन्दगी में था आया
थामा उसका हाथ जिन्दगी को उसने अपनी मोहब्बत से रंगीन बनाया
बुराई पर हुई अच्छाई की जीत ,ऐसे फरिश्तों ने इस दुनिया को है हसीन बनाया
रोशी

गुरुवार, 30 मार्च 2023

 सपने देखना मत छोड़ो ,कुदरत से बमुश्किल मौका मिलता है

किस्मत वाले होते हैं वो जिनके सपनों को खुला आसमां मिलता है
पंख सिर्फ वो ही है पाते जो बुलंद इरादे,जज्बों को जिन्दा हैं रख पाते
समंदर लांघने की हिम्मत है जो रखता ,ईश्वर भी उसके इरादे ना डिगा सकता
कड़ी मेहनत ,पूर्ण लगन जब हो दिल में ,वक़्त भी शायद उसकी परीक्षा है लेता
गर ठान लिया मन में तो चीर सकता है पर्वत का सीना भी हर इंसान
सिर्फ हवाई घोड़े कल्पना में दौड़ाकर कामयाब ना हुआ कोई इंसान
ऋषि ,मुनि ,वीर योधा सिर्फ वो ही दर्ज करा सके इतिहास में अपना नाम
जीवन जिन्होंने अपना समर्पित कर दिया था अपने निज कर्मों के नाम
रोशी
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बुधवार, 29 मार्च 2023

 खुल कर जियो ,उम्र को परे झटक दो ज़माने के साथ चलो

जितना स्वास्थ्य साथ दे उसी के मुताबिक खुद को ढालो
जितनी जिन्दगी बची है ,खुबसूरत लम्हों को भीतर समेट लो
यह अनमोल पल ना आएंगे वापिस यह जुमला दिल में उतार लो
बच्चे,परिवार ,दोस्त होते हैं सदेव जिन्दगी में खुशनुमा यादों के साथ
जिन्दगी के कैनवास में बेहतरीन यादों का ज़खीरा होता है उनके साथ
जिन्दगी का हर दिन नया तजुर्बा ,खट्टी -मीठी यादें सबको है देता
ख़ुशी-गम में तारतम्य बिठाना ,इतना नहीं आसान सबके लिए होता
जिन्दगी की आपाधापी में अपने ख्वाब ,शौक जो समेट दिए थे बक्से में
खोल कर उनको अब पूरे कर सकते हैं यह जज्बा रखिए दिल में
; उम्र ना रही कुछ नया करने की ;इस जुमले को जुबान पर ना लाना जिन्दगी में
कर गुजरने की गर हो हिम्मत हर उम्र में दुनिया की खुशियाँ कर सकते हैं मुट्ठी में
रोशी
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  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...