गुरुवार, 24 मार्च 2022

 यह दिल जैसी चीज़ भी खुदा ने खूब बनाई है

बड़ी -बड़ी दुश्वारियाँ झेल जाता है बड़े ही सुकून से
हल्की सी ठेस से चटख जाता है ,झट से ,चटाख से
इसका रिमोट होता है दिमाग में ,जिसमें सारी शैतानी ,हैवानियत भरी है
दिल तो बहुत कोमल ,नाज़ुक बनाया है खुदा ने ,गलती सारी दिमाग की ही है
बदनामी तो बेचारे दिल की होती है दिमाग तो पर्दे के पीछे ही सदेव रहता है
निष्कर्ष यह है कि संगत हमेशा उच्च रखो ,अपनी सहूलियत खुद परखो
जितने दुष -परिड़ाम हुए हैं उनका जिम्मेदार बेचारा यह दिल कदापि ना होता
फैसला गर खुद किया होता तो दिल इतना रुसवा ना हुआ होता ......
रोशी --
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सोमवार, 14 मार्च 2022

 बचपन से अगर सिखाया जाए सच और झूठ का फर्क ,ज्ञान ,गलत और सही

तो भावी जीवन कितना बेहतरीन हो सकता है ,सोचने की फुर्सत नहीं
माँ-बाप इतने व्यस्त हैं भौतिक जीवन में ,संस्कारों के लिए वक़्त नहीं
स्कूल -ट्यूशन लगा ज़िम्मेदारी निभाते ,बालक के साथ बैठने का वक़्त नहीं
जैसे साँचे में डालो मिट्टी आकार ले लेती है ,पर उसके लिए भी वक़्त नहीं
फिर कहते हैं आजकल बच्चे बिगड़ गए ,कुछ सुनते नहीं ,मानते नहीं फिर
जब हमको बचपन में वक़्त देना था ,तो दिया नहीं ,आज उनके पास समय नहीं
हमारा फर्ज़ पूरा करने में हमने कोताही बरती ,इस शिकायत के हम हकदार नहीं
रोशी --
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रविवार, 13 मार्च 2022

 

होली का आया त्योहार ,जो संग ले आता है कुछ नए धमाल
जीजा समझे साली को आधी घरवाली ,भाभी भी करे देवर संग कमाल
सबको मिले मौका अपनी को छोड़ पड़ोसन को समझे घरवाली
अनुकूल मौका ,भंग की तरंग सभी हुये अपने रंग में मस्त खेलने में होली
दादा -दादी पर चडा प्यार का अद्भुत रंग ,एक दूजे को रंग रहे बेखौफ मस्ती से
आँख की रोशनी ,काँपती काया साथ नहीं दे रहे ,आज उनको लाज नहीं जमाने से
नई नवेली घूँघट की ओट से निहार रही प्रीतम को ,रंग से सरोबार करने को बैचैन
होली का पर्व है अनूठा जो प्रिया प्रीतम सबको मौका देता जो था करने को मन बेचैन
रोशी --
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शनिवार, 12 मार्च 2022

 बड़ी दुश्वारी है मध्यवर्गीय परिवार के समक्ष आन पड़ी

कैसे मनाएँ होली का त्यौहार ?कोरोना ने है विपदा की खड़ी
किसी का अपना प्रिय साथ छोड़ गया ,किसी की गयी है नौकरी बरसों की
रोजगार खत्म हो गया ,बीमारी में पैसा चुक गया ,आपदा बड़ी है आन पड़ी
बच्चे रंग -पिचकारी के लिए हैं मचलते ,कैसे बयां करे माँ -बाप बड़ी मुश्किल घड़ी
घर -गृहहस्ती चलाना है बहुत टेड़ी खीर ,जो चलाये इसे वो जाने इसकी टेड़ी रीत
हमारी सभ्यता ,संस्कार हैं बहुत ही अद्भुत ,सांझा परिवार झेल जाते सारी मुसीबत
यही है हमारी पहचान विश्व -पटल पर , संभव नहीं सिवाय हिंदुस्तान के कंही भी
रोशी --
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Neena Mehrotra

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

 जो करना चाहो ,फौरन करो ,सोचो मत खुद के लिए भी वक़्त निकालो

जीवन है इतना मुश्किल ,खुद के लिए भी जी लो ,जो ना कर सके कर लो
सारी उम्र निकाल दी दूसरों के लिए ,अब अपनी खुशी भी ढूंढो
जिस में दिल खुश हो वही करो ,महसूस करो उस खूबसूरत पल को
क्या मालूम ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा ,तो आज से ही शुरुआत करो
इच्छछाओं को मारने में नहीं अब तो पूरा करने में खुद पर यकीन करो
कब तक जियोगे दूसरों को खुश करने में अब अपने लिए भी जी लो
सारी ज़िंदगी लगाकर सबको खुश नहीं कर सकते ,क्यौ ना अपनी खुशी ढूंढ लो
लोगों का क्या है ?उनके तंजों की परवाह छोड़ो अब अपने जी की भी कुछ करो
जीने का नज़रिया बदलेगा ,दिलो -दिमाग खुशिओं से लबरेज होगा ,शुरुआत तो करो
खुद को सुकून ,खुशी इतनी मिलेगी कि सारा जीवन महक उठेगा, नई खुशियो को समेट के देखो,
रोशी --
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