गुरुवार, 26 मई 2011

सुनो दोस्तों

विधाता ने तो दिया ऐसा सुंदर मानव रूप हमको 

दिए हमको गम तो बक्श दी ठेरों इनायतें हम पर 

कभी स्याह , कभी सफ़ेद दिखा दिए सब सपने हमको 

अगर रहता स्याह रंग से सरोबर जीवन हमारा 

तो सफ़ेद रंग का ना देख पते हम अदभुत नज़ारा 

जो भी ख़ुशी मिले जियो सदैव हंस के मेरे दोस्तों 

और मिले जो कभी गम तो उसे भी लगा लो गले दोस्तों 

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

अद्भुत सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!

बेनामी ने कहा…

बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

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