मंगलवार, 21 जनवरी 2014

देश के नेता





जब घर- द्वार ,अंदर-बाहर कंही भी जमा हो जाये धुल -मिटटी 
तो लेती है जरूर काफी वक्त हटाने में वो गंदगी 
पर ना जाने क्योँ चाहते हैं हम बस कुछ ही लम्हों में एकदम सफा करना उसको 
जो काई जमीं है बरसों से उलीचना उसको है नामुमकिन 
यह ही हाल है कुछ मेरे देश का इस वक्त दोस्तों 
अरे ,हम किसी पार्टी ,नेता की ना कर रहे हैं तरफदारी दोस्तों
जब इतना लंबा अरसा गुजार दिया गंदगी के दामन में
तो फकत कुछ वक्त तो दो नए बन्दों को
हमारे देश की जड़ों तक जो फ़ैल चुका है जहर इस नामुराद गंदगी का
उसको बुहारने का ,जड़ों तक पहुचने को जरूरत है कुछ नए इंसानों की
अब तक फैलाया है मकडजाल जिन्होंने उसको तोड़ने की
शायद इनसे सीखें कुछ सीख पुराने देश के करनधार
की हो गयी है अब जनता भी तैयार अपना परिवेश साफ़ करने को
वो भी सीख गयी है आस -पास फैली गंदगी बुहारना
अब जो नेता कुछ करेगा वही देश का परचम फैलाएगा

  तिनका -तिनका जोड़ चिड़ा-चिड़िया घरोंदा हैं बनाते हफ़्तों गुजार देते बारी-बारी अण्डों को सेने में वक़्त वो गुजारते मीलों उड़ान भर दाना चुग -चुग ह...