बुधवार, 7 सितंबर 2022

 ज़िंदगी और पहाड़ी सड़क में बहुत समानता होती है

कब ऊंचाई ,कब ढलान पता ही नहीं चलने देती है
कब हम आसमान से नीचे टपकते हैं पता ना है चलता
कैसे हम समतल डगर पर आ गिरते अंदेशा ना होता
ज़िंदगी में कब अचानक कुहासा आ जाए ज्ञात ना होता
जैसे पहाड़ पर चलते अचानक बदरी छा जाए ज्ञात ना होता
सबक देती हमको यह डगर ज़िंदगी का भरपूर जो हमको पता ना होता
कामयाबी और नाकामी रहो दोनों के लिए तैयार ,जैसे पहाड़ी यात्रा में होता
कब कोहरे की शक्ल में मुश्किल छा जाए जिसका एहसास भी ना किया होता
खुद को सम्हाल ,एक एक कदम जैसे बड़ाते पर्वतीय यात्रा में हम खुद को
वही फलसफा है ज़िंदगी का ,सावधानी हटी,दुर्घटना घटी ,सम्हालना है खुद को
-- रोशी
Like
Comment
Share
0 Comments

मंगलवार, 16 अगस्त 2022

 बड़ती उम्र ,सर के सफ़ेद बाल दे जाते ढेरों अनुभव ज़िंदगी की बेहतरीन डगर पर

स्वतः आ जाती है अक्ल ,हंसी भी आती अक्सर अपने खुद के विगत फैसलों पर
बचपन में सुना करते थे बुजुर्गों को कहते ,बाल धूप में कदापि सफ़ेद नहीं होते
वक़्त खुद -बा-खुद खोल देता है बंद अक्ल के ताले ,जो जवानी में नहीं हैं खुलते
बचपन से लेकर बुडापे तक रोज़ मिलता है तजुर्बा नवीन जो किताबों में ना मिलते
गलतियाँ खुद सिखाती हैं नए अनुभव ,दूसरों से भी ढेरों तजुर्बे हैं नित -प्रति दिन मिलते
हम बांटते हैं इनको अपनी नयी पीड़ी को ,जो उनको किसी किताब में नहीं मिलते
रोशी --
May be an image of 2 people, child, tree, outdoors and text
Like
Comment
Share

रविवार, 14 अगस्त 2022

 आज़ादी के पचतर सालों का लंबा सफर असां ना था हमारे लिए

बहुत सी कुर्बानियाँ दीं ,गहरे ज़ख़म खाए शहीदों ने हमारे लिए
देश बिभाजन का विषद दंश झेला ,घर ,बच्चे ,परिवार सब कुछ खोया
विस्थापन का दर्द झेला, पुनः ज़िंदगी को पटरी पर चलाया ,अपना दर्द भुलाया
आज उन्नतशील देशों की कतार में विश्वपटल पर भारत का नाम लिखवाया
सुंदर पिचाई ,पराग अग्रवाल, ऋषि सुनक ,जैसे धुरंधरों से सम्पूर्ण विश्व है थर्राया
हिंदुस्तानी दिमाग ,खूबसूरती ,कला का माना है आज संसार में सबने लोहा
न टिका है कोई इनके सन्मुख ,ना आज तक कोई मुक़ाबला कर पाया है
हमारे जवान जब पहन बरदी जाते है सरहद पर ,भूल जाते हैं अपना घर- संसार
देश की रक्षा का होता उनको जुनून गोली सीने पर खाई बस बचाने को हमारा परिवार
हमारा धर्म ,संस्कार ,आचार -व्यवहार और संस्कृति को अपना रहे और देश हैं
प्रत्यक्ष में तो कुछ नहीं बोल पा रहे पर दिल से करते हमारे देश को सलाम हैं
सफर पिछत्तर साल का यों आसा ना था ,बहुत चोट खाकर ,देश भट्टी में तपा था
पर आज हम विकसित देशों की कतार में आ पहुंचे ,इसके पीछे भी बहुत दर्द छुपा था
रोशी --
May be an image of one or more people and text that says 'Azadi Ka Amrit Mahotsav'
Like
Comment
Share

शनिवार, 13 अगस्त 2022

 बहनें आती हैं पीहर ढेरों प्यार और उत्साह समेटकर

आँचल में साथ बांध लाती हैं दुआएं और आशीर्वाद भरकर
महीनों पहले से सँजोती हैं ख्वाब पीहर के ,बुनने लगती हैं ढेरों सपने
माँ से सालों बाद मिलना होगा ,कलेजे को मिलेगी ठंडक जब गले लगाएगी अपने
याद आने लगेगी गली ,मोहल्ला और छत की मुंडेर ,जहां दफन हैं ढेरों ढेरों सपने
भाई -बच्चे राह तक्ते होंगे मेरी ,और बाबूजी -अम्मा भी देखते होंगे मेरा सपना बहनों का रास्ता ना कटता,पीहर की दूरी शायद बदती जा रही है सोचती जा रही
पीहर से जाते वक़्त बिखरा जाती हैं संपनतता के दाने और आशीर्वाद देती जा रही , हर तकलीफ ,परेशानी से रहे दूर मेरा पीहर यह ही मन्नत बहन मांगती जा रही
रोशी --
May be an image of text that says 'SisteR Being BrotheR and means being there for each other'
Like
Comment
Share

शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

 कितना पवित्र ,मोहब्बत से लबरेज त्योहार है रक्षाबंधन

चाहे कितना झगड़ें आपस में बहन-भाई पर मनाते हैं साथ रक्षाबंधन
है इस त्योहार में कुछ अजीब ताकत जो कोसों दूर से करीब ले आते अपनों को
रह ना पाते बिन मिले एक दूजे से इस पर्व पर खिंचे चले आते बीच में अपनों के
बारीक से सूत के धागे में निहित होती , अबूझे पवित्र प्यार की ताकत जन्मों से
भाई देता है वचन बहन की रक्षा ,हिफाजत का जो निभाता है बदस्तूर दिलों-जां से
बहन मानती है महफ़ूज खुद को भाई के साये में ,जीती है सारी ज़िंदगी सुकून से
द्रोप्दी की चीर का हक़ निभाया कृष्ण ने ,बचाकर उसकी इज्ज़त सिखाया सब को धागे का हक़ निभाना ,जब भी बहन हो संकट में भाई को है राखी का फर्ज़ निभाना
रोशी --
Uploading: 102476 of 102476 bytes uploaded.

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...