कभी किस्मत की गाड़ी बिन डीजल दौड़ जाती है
सारा श्रेय यात्री और उसकी गाडी को जाता है
अगर साथ हो ड्राईवर तो तारीफ उसको मिलती है
दूजा कोई उसी गाडी को चलाये तो गाडी रुक जाती है
सोचा है क्यौ?यह किस्मत होती है ,जो हमको नचाती है
सारी अक्ल ,काबिलियत धरी की धरी रह जाती है
हमारे जनम से पहले सुना है हमारी किस्मत लिख जाती है
जैसी विधना गाड़ी दौड़ाए वैसी हमारी ज़िंदगी दौड़ जाती है

रोशी--

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सर्दी का मौसम

मुलाकात

इंतजार