सोमवार, 8 अगस्त 2022

 हर बदलता दिवस सीखा जाता है जीवन में बहुत कुछ

कभी सीखते हैं हम स्वयं से,कभी समाज से ,परिवार से बहुत कुछ

शुरुआत होती है खुशनुमा सुबह से ,पक्षियों के कलरव से सीखते बहुत कुछ
तिनका -तिनका जोड़ बनाते आशियाना ,जन्मते उसमे बच्चे,जो ना रहते साथ कभी
पंख निकलते ही हो जाते फुर्र ,खुले आसमां में नव नीड़ बनाने जो ना घोंसले में लौटते कभी
बड्ते सूरज के साथ ज़िंदगी रोज़ परिचय कराती है ,उसके घटते ताप ,और चंद्र के उदय का भी
घर -गृहस्थी के नित-प्रतिदिन के कटु अनुभव भी कराते हैं परिचय जीवन की सच्चाई का
जीवन की डगर ना है इतनी सीधी,जो आती है नज़र ,उलट -फेर है इसके हर पहलू का
घर ,परिवार हाट-,बाज़ार दोस्त -दुश्मन हर जगह से मिलते हमको नित कटु -सुखद अनुभव
बिखरे पड़े हैं ढेरों जीवन के यथार्थ सत्य ,मथने ,परखने को चहुं ओर हमारे
क्या सीख पाये जाते दिन से सिर्फ होता हम ही पर निर्भर और जीने के नज़रिये पर हमारे रोशी
Uploading: 69856 of 69856 bytes uploaded.

रविवार, 7 अगस्त 2022

 मेरे अपने ,प्यारे दोस्तों के लिए कुछ उद्गार 

------------------------------------------

दुनिया का हर रिश्ता खुदा ने बड़ी मोहब्बत से है बनाया 

हर रिश्ते में एहसास ,प्यार जज़्बात सब उसने कूट -कूट कर है सँजोया 

पर हम जन्मते ही एक प्यारा खूबसूरत रिश्ता खुद बना बैठते हैं 

अपने दोस्त हम खुद बा-खुद  बचपन में ही बना बैठते हैं 

ना होता कोई खून का रिश्ता उनसे ,ना पुरानी पीड़ियों की रिश्तेदारी 

ना उनसे परिचय कराते हमारे माँ -बाप ,ना ही कोई होती उनकी हिस्सेदारी 

अपना दोस्त बनाना होता है सिर्फ हमारा निर्णय ,जिसमे होती दोनों की भागीदारी 

हमारी  खुशी,तकलीफ ,सुख -दुख का होता उसको पूरा भान और उसका एहसास

गर रहे ना इतने जज़्बात आपस में तो यह रिश्ता तब्दील हो जाता बकवास  

जब तक कोई समझें हमारे दोस्तों पर हर समस्या का हल चुटकी में निकल आता

होती है शायद दोस्तों के पास कुछ जादूई शक्तियाँ ,जो दिल में छुपाना चाहो झट बाहर निकल आता  

इस रिश्ते को बनाने में कायनात भी हो गयी फ़ेल ,जो अद्भुत रिश्ता इंसान ने है बनाया 

love u all my dear friends....

                                                                                                रोशी --



शनिवार, 6 अगस्त 2022

 तकलीफ को पूछने वाले ढेरों मिलेंगे,बांटने शायद दो -चार आएंगे

सलाह देने वाले ढेरों मिलेंगे ,तजुर्बेकार शायद दो- चार मिलेंगे
गलती बताने वाले ढेरों मिलेंगे ,सही राह पर ले जाने वाले ना मिलेंगे
नीचा दिखाने वाले ढेरों मिलेंगे ,आपको ऊंचाई पर देखने वाले कम मिलेंगे
जरा सा वक़्त क्या खराब होता ,उंगली उठाने वाले चारों ओर मिलेंगे
जब सितारे होते हैं सही दिशा में तो आपको सर पर बैठने वाले भी ढेरों मिलेंगे
Uploading: 44018 of 44018 bytes uploaded.

रोशी --

गुरुवार, 4 अगस्त 2022

 सिर्फ चेहरे की मुस्कुराहट ,पर ना जाओ ,साथ में आँखों को भी देखो

उसके पीछे छुपे दूजे चेहरे को पड़ने का हुनर रखो ,आँखों की भाषा सीखो
दर्द के सिवा और भी बहुत कुछ सिमटा होता है उसको ,देखते जाओ
आँखों को पड़ने का भी हुनर रखो ,उनकी अबूझ भाषा समझते जाओ
दिमाग के सारे द्वंद छुपे होते हैं चेहरे में ,जो आँखों से भी आते हैं नज़र
आपसे कटुता ,मित्रता है या धोखा ,प्रेम ,दुश्मनी है दिल में आता है सब नज़र
कामयाबी के पीछे यह हुनर छिपा होता जो हर किसी को ना आता नज़र
दिल से मिलना ,स्वार्थवश मिलना दोनों होते हैं अलग स्वयं जो आते नज़र
बशर्ते हम समझ सकें दोनों का फर्क ,ज़िंदगी हो जाएगी बहुत ही सुखद और सुंदर
रोशी --
Uploading: 22700 of 22700 bytes uploaded.

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

 ज़िंदगी की आपाधापी में कुछ पल अपने लिए रखो

कहकहे लगाओ ,गप्पे मारो ज़िंदगी का लुफ्त उठाओ
दोस्तों की गपशप भी भर देती है नीरस ज़िंदगी में रंग
नव -ऊर्जा का हो जाता संचार जो ज़िंदगी हो जाती बदरंग
चुहलबाजियाँ कर देतीं दिमाग की सर्विस ,भर देती नवरंग
रोजाना के बदस्तूर ज़िंदगी के सफर से कुछ पलों की निजात
है बहुत जरूरी गर चाहिए आपको खूबसूरत ,बेहतरीन ज़िंदगी
रोशी --
May be an image of 6 people, people standing, body of water and sky
Like
Comment
Share

शनिवार, 30 जुलाई 2022

 

छोटी-छोटी खुशियाँ भी जीवन को कर देती हैं रंगीन
इनको भी जी कर देखो जीने का नज़रिया हो जाएगा रंगीन
हर वक़्त हम जीवन की कमियाँ दूंदते रह जाते हैं ,यही सोच है संगीन
क्या हमने है पाया ?स्वस्थ काया ,सर पर छत,थाली में भोजन और वस्त्र
तनिक इनके बगैर जीवन सोच कर देखो ,सांस थम जाएगी ,होगा अति कष्ट
जो पाया है ,इनायत है ,मेहरबानी है उस रब की,गर कर लिया दिल को संतुष्ट
दूजे की थाली के लड्डू गजब लगते हैं ,यह ही है मानव स्वभाव की व्यथा
खुद के बनाए मकड़-जाल में उलझा रहता है सदेव ,यह ही है इसकी कथा
जो है ,जितना है उसमें खुश रहना है हमारे अपने बस में ,इसका ना कोई तोड़
जितना पाया उस रब से ,है वो बहुत अनमोल ,है बहुत अनमोल ......
रोशी --
May be an image of one or more people and text that says '"Be happy for this moment. This moment is your life." SHAR KHAYYAM Fem'

Like
Comment
Share

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

 माँ और बालक का है गर्भ से ही अटूट,अद्भुत रिश्ता

ज्यो होता नव जीवन का उदय स्वतः गढ़ जाता यह रिश्ता
बालक का पोषण,विकास सम्पूर्ण ही होता माँ पर निर्भर
माँ और बालक बन जाते एक दूजे के पूरक,और परस्पर निर्भर
दिन -प्रतिदिन पोषित होता स्वमेव यह रिश्ता, मिले ना दूजा मेल इसका
जब हो दुख -तकलीफ जीवन में आता स्वयं जुंबा पर नाम माँ ही का
सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड में है यह सच कि माँ के सिवा कोई नाम याद रहे ना किसी का
रोशी--

  माँ के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने के लिए,दुनिया को दिखाने के लिए सिर्फ एक दिन गर्भ में बच्चे के पोषण- विकास से लेकर इन्सान बनाने में अनगिन...