मां औलाद की खातिर क्या नहीं कर गुजरती ?अपनी शख्सियत मिटा देती है
नज़र का टीका,गले में काला धागा सारे टोटके मां औलाद के लिए करती है
अनपढ़ माँ दुनिया का सारा ज्ञान बच्चे को देती है ,संस्कारों की घुट्टी पिलाती है
बेहतरीन डिज़ाइनर को पीछे छोड़ उम्दा पोशाक खुद से सिलती -बुनती है
बोलना -चलना औलाद को सिखाती है ,समाज में जीने की तहजीब सिखाती है
औलाद बड़े होकर मां को बोलना ,उठना-बैठना,सजना संवरना सिखाती है
जिस अनपढ़ ने तमाम ज्ञान बचपन में सिखाया उसको औलाद अब ज्ञान देती है
बेशुमार हुनर औलाद के वास्ते माँ सीख लेती है उसको औलाद बेबकूफ कहती है
तुमको कुछ समझ ना आयेगा यह ताना अब उसकी औलाद दिन भर देती है
मां का दिल होता नरम ,औलाद की बातों को हंस कर मां हवा में उड़ा देती है
--रोशी
गुरुवार, 18 दिसंबर 2025
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