गुरुवार, 18 दिसंबर 2025


 जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ

कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो
जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन एक नेमत है रब की
एक दिन गर और मिल जाए जीने को मेहर है बहुत हम पर उस रब की
स्याह काली रात के बाद सबकी किस्मत में नहीं होता सुबह का सूरज
कब काल के पंजे दबोच ले जायें सेहतमंद काया को एकायक यूं अचानक
--रोशी


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