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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

ऐसा क्यो होता है ?

ईश्वर ने दी अनुपम सौगात 
लड़का हो या लड़की पर हमारा मन तो 
खबर सुनते ही उस विधाता पर 
दोषारोपण करने लग जाता है  
ऐसा क्यो होता है ?
बालक बैठने लगा ,चलने लगा 
बुद बुदाने लगा ,बोलने लगा 
मन दूसरे बालकों कि चाल-ढाल से 
तुलना करने लगता है
ऐसा क्यो होता है ?
बालक पाठशाला जाने लगता है 
मन लगातार शाला में ,टीचरों में 
उलझा रहता है दूसरी शाला ,अध्यापक बेहतर 
ऐसा क्यों होता है ?
बालक बोर्ड परीक्षा देता है 
मन लगातार दूसरे बालकों कि तैयारी और पढ़ाई 
हमारे बालक से बेहतर में , उलझा रहता है,
ऐसा क्योँ होता है? 
बालक कॉलेज जाता है  
मन दूसरे बालकों के करियर सर्विस में उलझा रहता है 
ऐसा क्यों होता है ?
बालक के पारिग्रहण का समय आया है 
मन दूसरे वर- बधुओ की तुलना में ही उलझा रहता है 
ऐसा क्योँ होता है ?
नाती- नातिन, पोता- पोती का होता है आगमन 
मन फिर वापिस उसी विधाता पर 
दोषारोपण करने लग जाता है 
ऐसा क्यों होता है ?