WATCH

शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

Roshi: माए से उपजा मायका

Roshi: माए से उपजा मायका: माई यानि माँ से ही उपजा शब्द मायका माँ ही चिडया कि मानिद समेट लेती है अपने बच्चे अपने लाडलों के साथ ही जीती और मरती है बेटियों में बसती ...

माए से उपजा मायका

माई यानि माँ से ही उपजा शब्द मायका
माँ ही चिडया कि मानिद समेट लेती है अपने बच्चे
अपने लाडलों के साथ ही जीती और मरती है
बेटियों में बसती है उसकी जान , hजीती है उनमें अपना आधा -अधूरा बचपन
स्वेटर की तरह ही तो रोज बुनती और उधेरती है नित नए सपने
व्याह दी जाएँ जब उसकी बेटियां तो सिर्फ आवाज़ से समझ जाती है
अपनी शहजादियों का दावानल ,उनकी पीड़ा और अब बदल जाते उसके स्वप्न
अब दूंदने में लग जाती माँ एक अदद अलादीन का चिराग
मिलते ही जिन्न से मांगे वो सिर्फ और सिर्फ अपनी लाडली का सुखमय जीवन
तभी तो माँ से ही होता मायेका और माँ से ही जीवन