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गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

                               नन्हे  मेहमान 
ओ  नन्हे  मेहनान ,तेरे  वास्ते है हम सब परेशान 
तेरी सलामती  और सेहत के लिए मन है  परेशा ,
बेचैन  हर  घड़ी  हर पल हैं नई आशाए ,नये सपने 
नये  रिश्ते  की ,सुगब गाहट ,नई  धड़कने 
 बढ़ती  है  धड़कन  दिल  की  मन  होता  है बेचैन  
हर दम  सोचती  हूँ  उस वेदना को और भर आते नैन   आंखों में आ  जाती  है सूरत  उस  नन्ही सी जान की  

             आन्या  के  जन्म  से  पहले
                       (धेवती )
                      ...... नारी की व्यथा .......
जीवन के अतीत में झांकने बैठी मैं पायी वहां दर्दनाक यादें 
और रह गयी स्तब्ध मैं ..समूचा अतीत था,  घोर निराशा और अबसाद में  लीन 
 कुछ भी ना था वहां खुशनुमा ........थी बस जिंदगी बदरंग और उत्साहहीन

 सपनो ने भरे  नये  रंग  भविष्य ने बुने सपने यादें कर घूमिल सजा लिए रंग जीवन में अपने..................
आज तक ढो रही थी जिन  लाशों का गठ्ठर तिल - तिल कर जी रही ,प्रतिदिन मर मरकर  शर्म और हया का उतार फेंका झीना आवरण जो था  वर्षो का बोझ सर पर 
बच्चों ने था ठहराया सही यही मेरी तपस्या का है..फल ☺☺
दफ़न कर गहरे में उस गठ्ठर को निज जीवन किया सफल 
जमाना भी देता  है नारी को घातक ताप
 वर्षो से यही हैं नारी की पीड़ा,भोगा हैं नारी जात ने इसका संताप 




   नव शिशु आगमन 
मन बेचैन है ,परेशान है ,आकुल है ,हैरान है 
नवागत के आगमन पर उमंगें है,उल्लास है
साथ ही मन में है भय सोचकर  उस पीड़ा का 
नवजीवन के आगमन पर होने वाली असहनीय पीड़ा
कैसे सह पाएगी लाड़ली बिटिया ,उस ममतिंक पीड़ा को 
मन काँप उठता है ,ह्रदय घबरा उठता है ,नींद जाती है उड़ ........
रूह कांप जाती है मेरी सोच कर वोह पल जब जन्मी थी यह लाड़ली 
गुजरे थे हम भी इस दौर से और जन्मी थी यही लाड़ली इसी शरीर से
प्रक्रति का यह नियम चलता रहेगा ..............इसी तरह से 

गुरुवार, 19 मई 2016

Roshi: लक्ष्मनरेखा

Roshi: लक्ष्मनरेखा: आखिर क्योँ लांघ जाती हैं घर की देहलीज़ यह मासूम बेटियां रहती हैं अंजान हरदुश्वारीसेयह मासूमकलियाँ छदिक् मोह,प्यार,औरउन्मादमेंकरबैठतीं ...

लक्ष्मनरेखा

आखिर क्योँ लांघ जाती हैं घर की देहलीज़ यह मासूम बेटियां रहती हैं अंजान हरदुश्वारीसेयह मासूमकलियाँ
छदिक् मोह,प्यार,औरउन्मादमेंकरबैठतीं हैंयहभयानकगलतियाँ
अपनापरिवार, परिवेश,गलियां,सहेलियांसबछोड़बैठतीहैं,सबएकपलमें
मायेकाऔरससुराल कहींभीनाजगह मिलती ,नामिलतासुकूं दोपल
भूलजातीहैंवोकि सीतानेजोकीथीभयानकभूल
मात्रएकलक्ष्मणरेखालांघनेकी......
परसाथउसकाभीकहाँदेपाएथेमर्यादापुरषोत्तम
बनकररहगएथेवोभीएकसाधारणपुरुष
विवाहोपरांतनाकरपाएसीताकीअस्मिताकीरक्षा
अपनीसीमा,लक्ष्मनरेखाखुदपहचानो
अगरलाँघोतोखुदजीनाभीसीखो

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

Roshi: तंज़ानिया की  युवती के साथ हुई अमानवीय  घटना  से...

Roshi:


तंज़ानिया की  युवती के साथ हुई अमानवीय  घटना  से...
: तंज़ानिया की  युवती के साथ हुई अमानवीय  घटना  से द्रवित ह्रदय  से निकले उद्गार ....... लड़की तो लड़की ही है क्या फर्क पड़ता है कि वो त...



तंज़ानिया की  युवती के साथ हुई अमानवीय  घटना  से द्रवित ह्रदय  से निकले उद्गार .......

लड़की तो लड़की ही है
क्या फर्क पड़ता है कि वो तंजानिया की है
या है वो बदनसीब हिन्दुस्तानी,
रगों में तो उसके बह रहा है एक समान लहू
काफिरों कोे देखा सिर्फ उसका जिस्म
और थी काफी उसकीआत्मा लहुलुहान करने के लिए
अस्मत,इज्ज़त से खेलना लड़की की तो जैसे है बाएं हाथ का खेल
काश,एक लम्हे को भी किया होता अपनी बहिन ,बेटी का ख्याल
रुक जाते उन बहशी दरिंदो के हाथ ,ना होता यूं लड़की का चीरहरण
पर यह तो होता ही आया है सतयुग से कलयुग तक
अभी ना जाने कितनी द्रोपदी बची हैं करवाने को वस्त्रहरण