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रविवार, 3 जुलाई 2011

पितृ दिवस

पितृ दिवस पर किया लिखूं पिता के बारे में
हम दो बहिनों का बचपन से जीवन सवांरा उन्होंने 
नहीं याद ऐसी कोई चाहत जो रही हो अधूरी 
हर कोशिश, यथाशक्ति से जो न की हो उन्होंने पूरी 
भाई न था तो बेटीयों को पाला बेटों से बढकर 
कभी न किया भेदभाव हमको लड़की समझकर 
हर यकीं के साथ भेजा बाहर हमको बढ-चढकर
ना रहने दी कोई कमी -कभी ,शादी व्याह और घर पर 
खाली पितृ दिवस पर याद करने-
बधाई देने पर होता न मकसद पूरा 
मकसद होगा उनके बताये उसूल, रास्तो पर चलकर 
उनके अनुभव और तजुर्वों से  कुछ सीखकर 
गर कर सके हम उन सपनो को पूरा 
तो यही होगा सच्चा प्यार और होगा सबका जीवन सुनहरा ....