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रविवार, 3 जुलाई 2011

पितृ दिवस

पितृ दिवस पर किया लिखूं पिता के बारे में
हम दो बहिनों का बचपन से जीवन सवांरा उन्होंने 
नहीं याद ऐसी कोई चाहत जो रही हो अधूरी 
हर कोशिश, यथाशक्ति से जो न की हो उन्होंने पूरी 
भाई न था तो बेटीयों को पाला बेटों से बढकर 
कभी न किया भेदभाव हमको लड़की समझकर 
हर यकीं के साथ भेजा बाहर हमको बढ-चढकर
ना रहने दी कोई कमी -कभी ,शादी व्याह और घर पर 
खाली पितृ दिवस पर याद करने-
बधाई देने पर होता न मकसद पूरा 
मकसद होगा उनके बताये उसूल, रास्तो पर चलकर 
उनके अनुभव और तजुर्वों से  कुछ सीखकर 
गर कर सके हम उन सपनो को पूरा 
तो यही होगा सच्चा प्यार और होगा सबका जीवन सुनहरा ....

21 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है आपने.

सादर

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut achchhi bhavabhivyakti .aabhar

शारदा अरोरा ने कहा…

bahut sahi likha hai ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

एक पिता के हृदय को छू लिया है आपने।

dipak kumar ने कहा…

sahi kaha ha aapne hame bhi bachpan se pita ne hi pala hai aur har kvahis puri ki hai
pita
har dukh unhone chhela hame sukh dene ke liye
khud kato me so gaye hame fulo me sulane ke liye

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मकसद होगा उनके बताये उसूल, रास्तो पर चलकर
उनके अनुभव और तजुर्वों से कुछ सीखकर
गर कर सके हम उन सपनो को पूरा
तो यही होगा सच्चा प्यार और होगा सबका जीवन सुनहरा

Bahut Sunder..... Hridaysparshi bhav hain...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

उनके बताये उसूल, रास्तो पर चलकर उनके अनुभव और तजुर्वों से कुछ सीखकर गर कर सके हम उन सपनो को पूरा तो यही होगा सच्चा प्यार
पितृ दिवस पर बहुत सुंदर भाव की प्रस्तुति के लिए आभार !

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर सोच...सुन्दर भावपूर्ण रचना..

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) ने कहा…

सुंदर संदेश देती यथार्थ परक रचना.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत हृदयस्पर्शी रचना!

JAGDISH BALI ने कहा…

Simply great !

अभिषेक मिश्र ने कहा…

एक आदर्श पिता की छवि साकार की है आपने. आभार.

mahendra srivastava ने कहा…

सुंदर एवं भावपूर्ण

Amrita Tanmay ने कहा…

सार्थक रचना है..बहुत बढ़िया....

Rakesh Kumar ने कहा…

बहुत कमाल के भाव हैं आपके
पिता के प्रति आपकी पावन श्रद्धा को
हृदय से नमन.
इतने उच्च संस्कार देने के लिए
आपके पिता श्री को नमन
ईश्वर सैदेव आप पर कृपा बनाये रखे.

मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

निवेदिता ने कहा…

उद्वेलित करती भावनायें ......

Minakshi Pant ने कहा…

पिता को समर्पित सुन्दर भावों से लिखी खुबसूरत रचना |

Sunil Kumar ने कहा…

bashut sundar pita ke hriday ko chhuti hui rachna badhai

mridula pradhan ने कहा…

उनके बताये उसूल, रास्तो पर चलकर
उनके अनुभव और तजुर्वों से कुछ सीखकर
गर कर सके हम उन सपनो को पूरा
तो यही होगा सच्चा प्यार और होगा सबका जीवन सुनहरा ....
bahut sunder bhaw.....

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा आपने... इस जमाने में ऐसे माता पिता भाग्यशाली लड़कियों के होते है... आपका आखिरी में लिखा पैगाम नीति वचन है.. सुन्दर

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब ...शुभकामनायें आपको !