शनिवार, 24 सितंबर 2011

नव योवना

व्याह कर आई वो नव्योवना ,उतरी डोली से सजन के अंगना 
नए सपने ,नयी उम्मीदे ले कर उतरी वो पी के अंगना 
अपनी गुडिया ,सखी-सहेली ,ढेरो यादे छोड़ आयी बाबुल के अंगना 
माँ-बाप की दुआएं ,भाई -बहनों का प्यार आशीर्वाद और लाज का गहना 
बस ये ही दहेज़ था उसके दमन में और थी माँ की सीख 
सुख हो या दुःख,तुमको है उसी ससुराल में मिल कर रहना और सहना...........  

  जिन्दगी बहुत बेशकीमती है ,उसका भरपूर लुफ्त उठाओ कल का पता नहीं तो आज ही क्योँ ना भरपूर दिल से जी लो जिन्दगी एक जुआ बन कर रह गयी है हर दिन ...