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बुधवार, 4 जून 2014

Roshi: नेक सलाह का शगल

Roshi: नेक सलाह का शगल: दुनिया को नसीहतें देने का था शगल,सो निभाते रहे सही और गलत से उनको रूबरू करवाते रहे अपने लिए कांटे, गैरों की राह फूलों से सजाते रहे उनकी ...

नेक सलाह का शगल

दुनिया को नसीहतें देने का था शगल,सो निभाते रहे
सही और गलत से उनको रूबरू करवाते रहे
अपने लिए कांटे, गैरों की राह फूलों से सजाते रहे
उनकी मुसीबतों को कमकरने के चक्कर में खुद भंवर में उतराते रहे
आज तक ना समझ सके वो गलती कर रहे थे या हम
इस नामाकूल शौक के चलते दोस्त कम दुश्मन ज्यादा बनाते रहे
सच्ची राह दिखाना ,नेक सलाह देना गर है गुनाह तो हम गुनाह ताजिन्दगी करते ही रहे

सोमवार, 2 जून 2014

Roshi: Roshi: आधुनिकता की तेज बयार

Roshi: Roshi: आधुनिकता की तेज बयार: Roshi: आधुनिकता की तेज बयार : मृतक की आत्मा की शांति हेतु रखे जाने पाठ भी अछूते ना बचे हैं आधुनिकता की तेज बयार से थोथा दिखावा ही बन कर रह...

Roshi: आधुनिकता की तेज बयार

Roshi: आधुनिकता की तेज बयार: मृतक की आत्मा की शांति हेतु रखे जाने पाठ भी अछूते ना बचे हैं आधुनिकता की तेज बयार से थोथा दिखावा ही बन कर रह गयी हैं प्राचीन रूदियाँ किस...

आधुनिकता की तेज बयार

मृतक की आत्मा की शांति हेतु रखे जाने पाठ भी
अछूते ना बचे हैं आधुनिकता की तेज बयार से
थोथा दिखावा ही बन कर रह गयी हैं प्राचीन रूदियाँ
किसी अपने का गम कम ,ना आने वालों का गम होता है ज्यादा
उसकी यादें सालती हैं कम ,उपस्थित संगत पर ध्यान होता ज्यादा
हम आने -जाने वालों की गिनती में ही उलझे रह जाते हैं ज्यादा
तनिक भी स्मरण नहीं करते उस पवित्र आत्मा को जो विलीन हो गयी ईश्वर में
अपने व्यापार ,कामकाज ,को निपटने की बस रहती है हमको हड़बड़ी
अपना घर ,बच्चे ,दुनिया के रासरंग के मकडजाल ने उलझा रखा है हमको इतना
तनिक ध्यान ना जाता कि हम क्या सिखा रहे अपने लाडलों को
हमारे पास जब वक्त है इतना कम अपनों को स्मरण करने वास्ते
तो वो बेचारे अपना कीमती वक्त कैसे निकालेंगे हमारे वास्ते ..........