मंगलवार, 26 जुलाई 2011

इंतजार

यह इंतजार भी कितनी खुबसूरत चीज है 
जन्म से मृत्यु तक हर इंसा के दिल को अजीज है 
बहु के पाँव भरी होने से शुरू होता है इंतजार 
पोता - पोती, दादा- दादी, नाना-नानी को रहता है इंतजार 
नवागत का आगमन कर देता है घर को गुलजार 
कब चलेगा, कब बोलेगा, कब बैठेगा अब है यह इंतजार 
कौन सा स्कूल, कौन सा कालेज क्या करियर होगा तब-तक 
युबाओं में अब जागी है चाह अपने प्रियतम से मिलन का इंतजार 
माँ को भी होता बहु और दामाद का घर आगमन का इंतजार 
रिश्ता तय हुआ, शुरू होता अब विबाह की  बेला का इंतजार 
है न कितनी खूबसूरत यह इंतजार नाम की बला 
कट जाती है पूरी जिन्दगी इंतजार ही इंतजार में .
ख़तम न होता यह जीवन में एक बार .....
                                                        रोशी अग्रवाल 


आया सावन झूम के

सावन की गिरती बूंदे  
भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास
और पपीहे की धड़कन बढ़ा  जाती हैं मिलन को  सजनी की आस
प्यासे खेत में टपकती बूंदों को देख लरजता है किसान का मन
सावन के अंधे को हरा ही दिखता है ,चरितार्थ करता है यह सावन
गाँव  में झूले, भरते ताल तलैया हुलस-हुलस उठता है मन
नीम और अमुआ पर  पड़े झूले उमंग से भर देते  हैं बालको का मन
पशु -पक्षी , नर नारी सम्पूर्ण धरा भी नाच उठती
है पाकर सावन का संग, पशु- पक्षियों का भी हुलास उठता मन  .......
                                                                   रोशी अग्रवाल 


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