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मंगलवार, 26 जुलाई 2011

आया सावन झूम के

सावन की गिरती बूंदे
भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन
तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास
और पपीहे की धड़कन
बड़ा जाती हैं सजनी की आस
पिया मिलन को धड़कता मन
प्यासे खेत में टपकती बूंदों को देख
लरजता है किसान का मन
सावन के अंधे को हरा ही दिखता है ,
चरितार्थ करता है यह सावन
गाव में झूले, भरते ताल तलैया
हुलस-हुलस उठता है मन
नीम और अमुआ पे पड़े झूले
उमंग से भर देते बालको का मन
पशु -पक्षी , नर नारी सम्पूर्ण धरा भी नाच उठती
है पाकर सावन का संग .......


11 टिप्‍पणियां:

B.S .Gurjar ने कहा…

सावन की गिरती बूंदे
भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन
तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास
और पपीहे की धड़कन
बड़ा जाती हैं सजनी की आस
पिया मिलन को धड़कता मन....हो जाता है बाबरा मन झूम उठता है वो भी पंछियों के संग ,चारों और बिखर जाते है सावन के रंग ........,,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सावन होता ही है इतना उत्साहवर्धक।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

मौसम के अनुकूल सुन्दर सावन का गीत!

वीना ने कहा…

सावन की तो बात ही निराली है....
बहुत सुंदर...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


आदरणीया रोशी जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

गाव में झूले, भरते ताल तलैया
हुलस-हुलस उठता है मन
नीम और अमुआ पे पड़े झूले
उमंग से भर देते बालको का मन
पशु -पक्षी , नर नारी सम्पूर्ण धरा भी नाच उठती
है पाकर सावन का संग .......

सावन का मनभावन चित्रण किया है आपने … आभार !


मेरी एक राजस्थानी रचना निम्नांकित लिंक के द्वारा पढ़ने-सुनने के लिए आमंत्रण है -
चौमासै नैं रंग है


हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
-राजेन्द्र स्वर्णकार

Anil Avtaar ने कहा…

सावन की गिरती बूंदे
भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन
तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास
और पपीहे की धड़कन
बड़ा जाती हैं सजनी की आस
पिया मिलन को धड़कता मन....

saawan ki bahut acchhi vyuakhya ki hai aapne
aabhar..

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

सुंदर कविता और मनमोहक चित्र| सावन का मज़ा ही ऐसा है भाई|


घनाक्षरी समापन पोस्ट - १० कवि, २३ भाषा-बोली, २५ छन्द

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सावन की गिरती बूंदे
भिगो जाती हैं सर्वस्व तन- मन
तृप्त कर जाती हैं धरती की प्यास
और पपीहे की धड़कन
बड़ा जाती हैं सजनी की आस
पिया मिलन को धड़कता मन


सावन में भीगी-भीगी सी सुन्दर रचना...

Apanatva ने कहा…

saamyik saavan maah ka gungaan kartee pyaree rachana...

mark rai ने कहा…

behad sunder shabdon me aapne sawan ka varnan kiya........thanks for coming on my blog also...

Dorothy ने कहा…

मेरे ब्लाग पर आने के लिए धन्यवाद... सावन की रिमझिमी फ़ुहार समेटे खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.