लगता नहीं है की पचास का आंकड़ा छू लिया है हमने पूरा
पीछे मुड़कर देखा तो पाया, कि अभी तो हम बच्चे थे
क्यूंकि हर वक्त माँ पिता का वरद हस्त था हम पर पूरा
माँ तो हमेशा बना कर रखती थीं ,अपना छोटा बच्चा हमको पूरा
जिन्दगी उलझ गई छोटे- छोटे बच्चों को पालने - पोसने में
उनकी शिक्षा, उनकी जिन्दगी के अहम् फैसलों को किया पूरा
दो बेटिओं के बाद पाया राघव (बेटा) जिसने जीवन को था हमारे संवारा
फिर खोया माँ को, अचानक लगा जिंदगी को खुशिओं का साथ न था गवारा
जिन्दगी फिर दौड़ने लगी पटरी पर क्यूंकि जाने बाले के साथ है न जाया जाता
समय चक्र का पहिया दौड़ रहा था और हमको तनिक न पता चला
जब जाना करीब से तो पाया कि हम आधी से ज्यादा यात्रा पूरी कर आये
अब थोडा जीवन बाकी है आशा है सुख से यह भी कट जाये
हम वो पल न भूल पाएंगी जब प्रभु ने दिया एक अनुपम उपहार
आन्या (नातिन) से पाया मैंने नव निर्मल रिश्तो का संसार
पचासवी तो मना रही हूँ सबके साथ,75 वी0 भी शायद मना ले आप लोगो के साथ
ये सब कुछ है अब परम पूज्य ठाकुर जी के हाथ बस ईश्वर के हाथ ....
रोशी अग्रवाल
