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गुरुवार, 1 सितंबर 2011

अर्धशतक किया है आज मैंने पूरा

जीवन का अर्धशतक किया है आज मैंने पूरा 
लगता नहीं है की पचास का आंकड़ा छू लिया है पूरा
पीछे मुड़कर देखा तो पाया, कि अभी तो हम बच्चे थे 
क्यूंकि हर वक्त माँ पिता का वरद हस्त था हम पर पूरा
माँ तो हमेशा बना कर रखती थीं ,अपना बच्चा हमको पूरा
फिर जिन्दगी उलझ गई छोटे- छोटे बच्चों को पालने पोसने में 
उनकी शिक्षा, उनकी जिन्दगी के अहम् फैसलों को किया पूरा
दो बेटिओं के बाद पाया राघव (बेटा) को जिसने जीवन को हमारे संवारा  
फिर खोया माँ को, लगा जिंदगी को खुशिओं का साथ न था गवारा 
जिन्दगी फिर दौड़ाने लगी पटरी पर क्यूंकि जाने बाले के साथ न जाया जाता 
समय चक्र का पहिया दौड़ रहा था और हमको तनिक न पता चला 
जब पता चला तो पाया कि हम आधी से ज्यादा यात्रा कर आये 
अब थोडा जीवन बाकी है आशा है सुख से कट जाये 
हम वो छडं न भूल पाएंगी जब प्रभु ने दिया एक अनुपम उपहार 
आन्या (नातिन) से पाया मैंने नव निर्मल रिश्तो का संसार 
पचासवी तो मना रही हूँ सबके साथ 75 वी0 भी शायद मना ले आप लोगो के साथ
ये सब कुछ है अब परम पूज्य ठाकुर जी के हाथ ....