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शनिवार, 18 जुलाई 2015

Roshi: Roshi: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद...

Roshi: Roshi: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद...: Roshi: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहा... : हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहानी ,उसका पात्र वो छोटा बालक...

Roshi: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहा...

Roshi: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहा...: हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहानी ,उसका पात्र वो छोटा बालक हामिद ,उसकी बूडी दादी जरूर याद आते हैं जब बच्चों के हाथ में ख...
हर वर्ष ईद पर  बचपन में पड़ीं मुंशी प्रेमचंद की कहानी ,उसका पात्र वो छोटा बालक हामिद ,उसकी बूडी दादी जरूर याद आते हैं जब बच्चों के हाथ में खिलोनें ,,गुब्बारे ,फिरकी आदि देखती हूँ तो हामिद का दादी के लिए ईदगाह से लाया हुआ चिमटा जरूर याद आता आता है ....कितना दर्द था उसमे  ,दादी -पोते के प्यार की अद्भुत रचना लिखी थी बरसों पहले प्रेमचंदजी ने 

मंगलवार, 14 जुलाई 2015

Roshi: कच्ची नींव

Roshi: कच्ची नींव: बरसों की प्यार ,मोहब्बत की ईटों की चुनाई बड़े फख्र से बनाते रहे मंजिल दर मंजिलें इतराते रहे जिस मकां की बुनियाद पर जिंदगी भर वो तो थी खोख...

कच्ची नींव

बरसों की प्यार ,मोहब्बत की ईटों की चुनाई
बड़े फख्र से बनाते रहे मंजिल दर मंजिलें
इतराते रहे जिस मकां की बुनियाद पर जिंदगी भर
वो तो थी खोखली ,दीमक से भरपूर
सब प्यार ,रिश्ते थे खोखले ,बेमानी
सिर्फ मतलब और स्वार्थ पर खड़ी थीं वो मंजिले
गिरना तो था ही उनकी नियति ,
मकां बनाते वक्त ठोस नीव की होती है सख्त जरूरत
हमसे हुई है गलती ,उसका खाम्याजा भुगत रहे है आज तक 

रविवार, 12 जुलाई 2015

Roshi: अर्ज हमारी

Roshi: अर्ज हमारी: हे माधव आज है हमारी अर्ज आपसे अनोखी और न्यारी किसी की किस्मत और झोली भर देते हो आप लबालब सम्पूर्ण सुख ,ऐश्वर्य ,स्वास्थ्य से अत्यंत भारी ...

अर्ज हमारी

हे माधव आज है हमारी अर्ज आपसे अनोखी और न्यारी
किसी की किस्मत और झोली भर देते हो आप लबालब
सम्पूर्ण सुख ,ऐश्वर्य ,स्वास्थ्य से अत्यंत भारी
लगभग पूरी उम्र निकल ही जाती है बिन दुःख ,तकलीफ
या कुछ छोटे -मोटे मसलों के के मुरारी
पर कभी तो इतनी मितव्यता ,कृपणता कर जाते हो माधव
कि कलेजा भी हार जाता है दर्द ,तकलीफों को देखकर
तन ,धन ,रंग -रूप बाँटने में ज्यादा ना किया करो पक्षपात
थोड़ी बहुत उंच -नीच तो वाजिब है ,हो ही जाती है
पर इतनी भिन्नता ना रखा करो त्रिपुरारी
ऐश्वर्य ,सम्पन्त्ता तो ना खलती हैं माधव
पर भूख ,गरीबी ,बीमारी को देखकर तुमसे कर डाली है अर्ज
थोडा सा कर दो अपनी लीलाओं में बदलाव
दिखा दो दुनिया को अपनी लीला न्यारी 

शनिवार, 4 जुलाई 2015

Roshi: दिल

Roshi: दिल: दिल जैसी बड़ी अजीब शै है खुदा ने खूब बनाई जिस्म ,रूह सभी पर है इसका बखूबी कब्ज़ा भाई यह खुश तो सभी अंगों पर रहती है बाहर खूब छाई दुखी दिल तो...

दिल

दिल जैसी बड़ी अजीब शै है खुदा ने खूब बनाई
जिस्म ,रूह सभी पर है इसका बखूबी कब्ज़ा भाई
यह खुश तो सभी अंगों पर रहती है बाहर खूब छाई
दुखी दिल तो सारी कायनात के सुकूं भी निराधार हैं भाई
आँखों को भी यह कमबख्त वही है दिखता जो खुद देखना चाहें है भाई 
तन के घावों का उपचार तो हकीम -वैध कर देवे
पर दिल की चोटों का नहीं है धरा पर कोई इलाज है भाई
बड़ी कीमती ,बेमिसाल सौगात बक्शी है ईश्वर ने हमको
इस दिल की मुकम्मल देखभाल करो मेरे भाई