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गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

Roshi: नन्ही बिटिया

Roshi: नन्ही बिटिया: जब गर्भ में थी बिटिया तो कभी ना आया ख्याल उस गुनाह का क्यूंकर हम हत्या करने जा रहे थे मासूम जिंदगी की ,नन्ही कली की क्योँ ना हुआ गुमा हमक...

नन्ही बिटिया

जब गर्भ में थी बिटिया तो कभी ना आया ख्याल उस गुनाह का
क्यूंकर हम हत्या करने जा रहे थे मासूम जिंदगी की ,नन्ही कली की
क्योँ ना हुआ गुमा हमको एक पल भी उस मासूम का अस्तित्व नेस्ताबूत करते वक्त
जब -जब कोई पायल की सुनेंगे रुनझुन याद आयेगी यह ही बिटिया
रंगीन ओड़नी,सितारों से लकदक लहंगा देख रोयेगा मन इस बिटिया को याद कर
हाथों पर मेहँदी के बूटे सखियों के देख रुकेगी ना आंसूओ की लड़ी
नवरात्रों में जब ना होगी कोई कन्या आसपास पूजने को उसके पाँव
भाईओं की जब रहेगी सूनी कलाई ,ना दिकेगी कोई बहिन उनके आस -पास
माँ की पीड जो समझ लेती चुटकी बजाते पल -भर में ,
नन्ही कलाइयों में रंग -बिरंगी चूड़ी खनकाती ना  नज़र आएगी मासूम बिटिया
सुबह आँख खुली और सपना टूटा,और बच गए हम उस गुनाह से
जो करने जा रहे थे क्रूरतम पाप अपने हाथों से  

बुधवार, 9 अप्रैल 2014

Roshi: कन्या

Roshi: कन्या: कल नवमी पर गए थे मंदिर माता के दर्शन करने ,वहां देखा जगह -जगह भंडारे हो रहे थे और बड़ी चहल -पहल थी बड़ा शोर था  पास जाकर देखा तो कन्याओं के व...

कन्या

कल नवमी पर गए थे मंदिर माता के दर्शन करने ,वहां देखा जगह -जगह भंडारे हो रहे थे और बड़ी चहल -पहल थी बड़ा शोर था  पास जाकर देखा तो कन्याओं के वास्ते लड़ाई हो रही थी क्यूंकि कुछ ही बच्चियां वहां पर नज़र आ रही थी और उनको लेकर खींचातानी हो रही थी ,उन कन्याओं को पूजा और भोजन वास्ते हर कोई अपने साथ ले जाना चाह रहा था  बच्चियां कह रही थी भूख नहीं है ,हम थक गए हैं पर आज तो उनके पैर छू -छू कर मनाया जा रहा था ......वाह रे विधाता क्या किस्मत लिखी है स्त्री जात की बस एह दिन मान -मनुहार अगले दिन ही तिरस्कार  आज भरपेट भोजन कल से ही अत्याचार ,यूं ही सिलसिला चलता रहा भ्रूण -हत्या का ,बहुओं को यूं ही जलाते मारते रहे ,लड्कियौं की अस्मत  यूं ही पाँव तले रौंदते रहे तो वो दिन दूर नहीं कि हिन्दुस्तान के स्थान पर विदेश जाना होगा बहु लेने .....   कई राज्यों में तो विवाह हेतु कन्याओं कीबहुत कमी हो गयी है ..............kanya